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ॐ ह्रीं केवलज्ञान कल्याणक प्राप्ताय श्री विमलनाथ जिनेन्द्राय नमः |

रवीन्द्र जैन के भजन

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हम यही कामना करते हैं

मस्तकाभिषेक १९९३

मस्तकाभिषेक

बेरागी ओं

बढ़ बरसो

चलो करें हम

सारे तीर्थ बार बार

सावंलिया पारस नाथ

सुनो जिन वाणी

महावीर कहो

तेरे पांच हुआ

वर्तमान को वर्दमान

करुणाके भण्डार

तीरथ शिरोमणि

जय जिनेन्द्र बोलो

अधुरे मुनिवर के

कहा मिलेगे हमें विमल

गुण सहारा विधासागर

वामन गजा

चिंतामणि पाशर्व कहाये

राजुल नेमी से सजा

महावीर की मुंगावर्णी

विमल विन्यांजली

चंदाप॒भु की जय

चलो तेजरा जाना

ओठे परजिसके पारस

आदिपुरुष

गुरु

जीवन

बाहुबली की आरती

जय बाहुबली

तं गोमटेसम्

बंदे जिनवरं

ले चालो मोहे

नर तन रतन अमोल

मन्त्र णमोकार

महावीर झूले पलना

जय-२ सम्मेदशिखर