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वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा

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वीरा वीरा, श्री महावीरा

तर्ज—फिरकी वाली......

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वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा, सन्मति शुभ नाम है।

सारे जग का सितारा वर्धमान है।। टेक.।।
हिंसा की तांडव लीला जब, सारे जग में छाई थी।
कुण्डलपुर नगरी में त्रिशला, के घर बजी बधाई थी।।
सिद्धारथ का, मनसिज हरषा, हुई रतन की वर्षा।
वीरा वीरा, श्री महावीरा, मेरे अतिवीरा, सन्मति तेरा नाम है।
सारे जग का सितारा वर्धमान है।।१।।
चैत्र सुदी तेरस के दिन जब, जन्मकल्याणक आया था।
स्वर्गों से इन्द्रों ने आकर, उत्सव खूब मनाया था।।
ऐरावत पर, तुमको लाकर, चला इन्द्र सह परिकर।
वीरा तुमको, सुमेरू पर्वत, की पांडुशिला पर, किया विराजमान है।
जन्म अभिषव कर पुकारा तेरा नाम है।।२।।
यौवन में ही दीक्षा लेकर, बालयती कहलाए थे।
केवलज्ञान प्राप्त कर प्रभु जी, समवशरण में आए थे।।
दिव्यध्वनि से, सारे जग के, जीवन हुए प्रतिबोधित।
वीरा तेरी, सुहानी वाणी, को सुनकर ज्ञानी, बने भगवान हैं।।
सारे जग का सितारा वर्धमान है।।३।।
कार्तिक कृष्ण अमावस के दिन, सिद्ध अवस्था पाई थी।
पावापुरी नगरी में सबने, दीपावली मनाई थी।।
युग के अंतिम, तीर्थंकर तुम, करे ‘‘चंदना’’ वन्दन।
वीरा तेरी, अमर है कहानी, सभी ने जानी, न तुझ सी कोई शान है।
सारे जग का सितारा वर्धमान है।।४।।

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