Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में विराजमान हैं, दर्शन कर लाभ लेवें ।

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

शाम सबेरे दो घड़ी तू आतम ध्यान लगाया कर

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

शाम सबेरे दो घड़ी

शाम सबेरे दो घड़ी, तू आतम ध्यान लगाया कर।

यही तपस्या है बड़ी, तू राग और द्वेष हटाया कर।।टेक.।।
सोचा कर तू मन में मैं हूँ, कौन कहाँ से आया हूँ।
क्या करना था मुझे यहाँ पर, क्या कुछ कर मैं पाया हूँ।
जाना है किस ठोर को तू, दिल में ख्याल ये लाया कर।।यही तपस्या..।।१।।
पाप और पुण्य किया है कितना, रोज हिसाब लगाया कर।
पाप अगर हो जाए अधिक तो, उस पर पश्चाताप कर।।
और कभी फिर भूल कर भी, वह न पाप कमाया कर।।यही तपस्या..।।२।।
पाप कर्म को छोड़ो भाई, पुण्य कर्म को कर दीजे।
पाप कर्म संसार का कारण, यह दृढ़ निश्चय कर लीजे।।
पाप कर्म को छोड़कर तू, भाव विशुद्ध बनाया कर।।यही तपस्या..।।३।।
मैं न किसी का कोई नहि मेरा, तन से भी मैं न्यारा हूँ।
रागद्वेष नहि भाव हमारा, दर्शन ज्ञान भंडारा हूँ।।
ऐसा दिल में सोचकर तू, परपद में नहिं जाया कर।।यही तपस्या..।।४।।
मैं ही ब्रह्मा मैं ही विष्णु, मैं ही तो परमेश्वर हूँ।
मेरा आतम है परमातम, मैं शुद्धात्म जिनेश्वर हूँ।।
ऐसा दिल में सोचकर तू, निज पद में ही आया कर।।यही तपस्या..।।५।।


BYS 200x225.jpg