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21 फरवरी को मध्यान्ह 1 बजे लखनऊ विश्वविद्यालय में पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगल प्रवचन।

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें पू.श्री ज्ञानमती माताजी एवं श्री चंदनामती माताजी के प्रवचन |

शिर्डी

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अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिर्डी में ‘ज्ञानतीर्थ’ का उद्भव

पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की पावन प्रेरणा से प्राचीन तीर्थ भूमियों एवं कल्याणक तीर्थों का जीर्णोद्धार एवं विकासकार्य किया गया ही है लेकिन माताजी के दूरगामी एवं विस्तृत दृष्टिकोण को हम शिर्डी में बने ‘‘ज्ञानतीर्थ’’ के विकास से पहचान सकते हैं। वर्तमान में शिर्डी एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्थल है, जहाँ मेन हाइवे पर पूज्य माताजी की प्रेरणा व आशीर्वाद से भगवान पार्श्वनाथ कमल मंदिर का भव्य निर्माण नवोदित ‘‘ज्ञानतीर्थ’’ पर किया जा रहा है। पूज्य माताजी के हृदय में एक ही भावना है कि शिर्डी में जैन तीर्थ के निर्माण से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जैनधर्म के अहिंसामयी सिद्धान्तों का प्रचार-प्रसार होगा एवं जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा के दर्शन करके जैन अथवा जैनेतर सभी श्रद्धालुजन तीर्थंकर भगवन्तों के वैराग्यमयी जीवन एवं जैनधर्म में मोक्षमार्ग के संदर्भ में ज्ञान प्राप्त कर सवेंगे।

शिर्डी में तीर्थ निर्माण के लिए सर्वप्रथम कोपरगांव की अरिहंत महिला प्रतिष्ठान की सुश्री विशल्याताई गंगवाल तथा श्रीमती प्रेमाबाई बज एवं नासिक के श्री राजाभाऊ पाटनी आदि कुछ लोगों के मन में भावनाएँ जागृत हुई थीं, जिसके उपरांत उन्होंने सन् २००२ में प्रयाग तीर्थ पर पूज्य माताजी के समक्ष अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। विचार-विमर्श के मध्य ही प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी एवं पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज ने शिर्डी प्रोजेक्ट के लिए प्रोत्साहन वृद्धिंगत करते हुए कहा कि पूज्य माताजी का आशीर्वाद इस कार्य के लिए अवश्य ही है और कार्य को प्रगति की ओर ले जाना चाहिए। तभी से तीर्थ निर्माण के लिए ट्रस्टी बनाने का कार्य शुभारंभ कर दिया और ट्रस्ट के अन्तर्गत शिर्डी में स्थित मोहल्ला साविली विहीर के चौराहे पर मेन हाइवे पर एक जमीन क्रय करके तीर्थ निर्माण की योजना प्रारंभ की।

पूज्य माताजी ने इस तीर्थ पर विशाल कमल मंदिर निर्माण की प्रेरणा प्रदान की और ८१ फुट ऊँचे कमल मंदिर में १५ फुट उत्तुंग भगवान पाश्र्वनाथ की विशाल पद्मासन प्रतिमा विराजमान करने हेतु संघपति श्री महावीर प्रसाद जैन-दिल्ली ने स्वीकृति दी और सन् २००५ में यह प्रतिमा तीर्थ पर पहुँच भी गई। विकास का क्रम चलता गया और सर्वप्रथम दिनाँक ४ दिसम्बर २०११ को इस तीर्थ का भव्यतापूर्वक शिलान्यास समारोह सम्पन्न हुआ तथा दिनाँक १५ मई से २० मई २०१३ के मध्य उपाध्याय मुनि श्री मयंकसागर जी महाराज एवं जम्बूद्वीप के पीठाधीश कर्मयोगी स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी के सान्निध्य में राष्ट्रीय स्तर पर धूमधाम के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठापूर्वक ‘‘ज्ञानतीर्थ’’ का उद्भव हुआ। वर्तमान में इस तीर्थ पर ८१ फुट ऊँचे कमल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है तथा यात्रियों की समस्त सुविधा हेतु डीलक्स आवासीय फ्लैट्स आदि का निर्माण करके तीर्थ की कीर्ति को दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि करने हेतु समूचा ट्रस्ट मण्डल अनवरत लगा हुआ है।

अत: शिर्डी जैसे विश्व प्रसिद्ध केन्द्र पर पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की पावन प्र्रेरणा से तथा प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के मार्गदर्शन एवं कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी की अध्यक्षता में आज हम सबके बीच जैनधर्म की अंतर्राष्ट्रीय प्रभावना हेतु ‘‘ज्ञानतीर्थ’’ एक अद्भुत आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में उभर कर आया है, जिसके लिए यह समाज पूज्य माताजी के प्रति अत्यन्त नतमस्तक होते हुए सदैव इस तीर्थ के विकास हेतु उनका वरदहस्त चाहता है।