Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास टिकैतनगर-बाराबंकी में चल रहा है, दर्शन कर लाभ लेवें |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

श्री सुदर्शन मेरू की आरती B

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

श्री सुदर्शन मेरू की आरती B

Diya123.jpg
Asia 2734.jpg


तर्ज—मैं तो आरती.............


मैं तो आरती उतारूं रे, मेरू सुदर्शन की,
जय जय जय मेरू शिखर, जय जय जय।।टेक.।।
बड़े सुन्दर हैं जिनबिम्ब, मेरू के मंदिर में।मेरू के...........
चारों दिशा में चार बिम्ब, मेरू के मंदिर में।।मेरू के.......
भक्ति करो घूम-घूम, नृत्य करो झूम-झूम, जीवन सुधारो रे,
हो हो प्यारा-प्यारा जीवन सुधारो रे।।मैं तो आरती.........।।१।।
ऐरावत पर चढ़कर, इन्द्र जाता है मेरू पे।।इसी ही मेरू पे।।
तीर्थंकर का जन्माभिषेक, करता है मेरू पे।। इस ही मेरू पे।।
चार वन हैं शोभ रहे, देव जहां खेल रहे, आभा निराली है,
हो हो जिनकी आभा निराली है।।मैं तो आरती.........।।२।।
इस मेरू की महिमा अचिंत्य, ग्रंथों में कहते हैं।।ग्रंथों में.......
करे ‘चन्दनामती’ जो प्रभु भक्ति, सिद्धी को वरते हैं।। सिद्धी को......
स्वर्णाचल मेरू कहे, अकृत्रिम जिनबिम्ब रहे, रचना है प्यारी रे,

हो हो रचना है प्यारी रे।।मैं तो आरती........।।३।।