श्रेणी:दश धर्म प्रवचनांश

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दशलक्षण धर्म

जो आत्मा को उत्तम सुख में धरे वह ‘धर्म’ है अर्थात् जिसके पालन से स्वर्ग-मोक्ष की प्राप्ति हो वह धर्म कहा जाता है। जीव दया का पालन करना, परोपकार करना, दान करना, व्रत-उपवास करना ये सभी विविध मतावलम्बियों द्वारा धर्म कहे जाते हैं पर तीर्थंकर भगवन्तों ने धर्म के ये दश लक्षण भी बताये हैं यथा-उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं ब्रह्मचर्य। इन धर्मों को अपने आचरण में उतारने से आत्मा निर्मल बनती है एवं जीव के कल्याण का पथ प्रशस्त होता जाता है। क्रम-क्रम से दश दिन तक एक-एक धर्म के विषय में आप पढ़ेंगे........