सभी मिल बोलो जय जय

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सभी मिल बोलो जय


तर्ज—जपूँ मैं जिनवर जिनवर.......

सभी मिल बोलो जय जय, ज्ञानमती माता की जय,
जन्मजयंती का आया है शुभ अवसर,
आया है अवसर.....सभी मिल बोलो जय.।।टेक.।।

शरदपूर्णिमा का दिन सुन्दर, सन् उन्निस सौ चौंतिस का दिन,
मोहिनी माता धन्य हुर्इं इन्हें पाकर,
कन्या पाकर-२, सभी मिल बोलो जय जय.।।१।।

पुन: शरदपूनो ही आई, सन् बावन की तिथि हरषाई।
ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया अति सुन्दर,
घर भी दिया तज-२, सभी मिल बोलो जय जय.।।२।।

वे ही गणिनी ज्ञानमती हैं, युग की पहली बालसती हैं।
इनकी महिमा दिखती है टी.वी. पर,
लगती सुखकर-२, सभी मिल बोलो जय जय.।।३।।

ग्रंथ सैकड़ों लिख दिये इनने, तीर्थ कई विकसित किए इनने।
चन्दनामति ये चेतन तीर्थ हैं सुखकर, तीर्थ हैं सुखकर-२
।।सभी मिल.।।४।।

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