समयसार

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समयसार -

आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी द्वारा रचित समयसार ग्रन्थ अध्यात्म जगत् का सर्वोपरि ग्रन्थ माना जाता है । इसमें ४४४ गाथाएँ प्राकृत भाषा में हैं । उन गाथाओं पर आचार्य श्री अमृतचंद्रसूरि ने आत्मख्याति नाम से संस्कृत टीका लिखी एवं आचार्य श्री जयसेन स्वामी ने तात्पर्यवृत्ति नाम की संस्कृत टीका लिखी है । इन दोनों टीकाओं की पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अलग- अलग हिन्दी टीका लिखी है । जो जम्बूद्वीप - हस्तिनापुर से दो भागों में प्रकाशित हुई है । स्वाध्यायी जन इनका स्वाध्याय अवश्य करें ।