सांची कहूँ प्रभु दर्शन से हमरे

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सांची कहू प्रभु


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तर्ज-सांची कहें तोरे........

सांची कहू प्रभु दर्शन से हमरे, मन के भागे विकार हो जी।
समता की सूरत, वीतराग मूरत, अपने प्रभू को निहार लो जी।।टेक.।।

दर्शन से मिटता है मिथ्या अंधेरा,
हट जाएगा काले कर्मों का डेरा।
भाव बढ़ा लो, पूजा रचा लो, भरो पुण्य भंडार हो जी।।१।।

निशदिन ध्यान धरूँ प्रभु तेरा,
हो जाएगा तब सम्यक् उजेरा।
ध्यान लगा लो, कर्म जला लो, करो धर्म संचार हो जी।।२।।

जिसने तुमको मन में ध्याया,
आत्मोन्नति कर मुक्ती पाया।
कहे ‘‘चन्दना’’ लो प्रभु शरणा, हो जावेगा उद्धार हो जी।।३।।