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सामान्य भजन

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सामान्य भजन (१ नं. से ४८ नं.तक)


तेरह द्वीप की रचना -भजन नं.१

तेरे हाथों की -भजन नं.२

मन वांछित फल देने वाला-भजन नं.३

चलो सब मिल यात्रा -भजन नं.४

अरे जग जा रे चंतन-भजन नं.५

संतो का तुम्हें नमन -भजन नं.६

षट्खण्डागम ग्रन्थराज को -भजन नं.७

कान खोल के -भजन नं.८

संगम के तटपर प्रभु के -भजन नं.९

आओ रे आओ रे सब मिल के आओ -भजन नं.१०

सारे जग का तू सरताज -भजन नं.११

धन्य धन्य वे लोग यहाँ -भजन नं.१२

गहरी गहरी नदिया संगम की धारा है -भजन नं.१३

मूल से लेकर चूल शिखेर -भजन नं.१४

निर्वाण उत्सव विशाल बाबा -भजन नं.१५

दुनिया में भगवंतों के मंदिर अनेक हैं -भजन नं.१६

आओ करे चौबीस कल्पद्रुम की पूजा -भजन नं.१७

जनम जनम में पाऊं जिनवर -भजन नं.१८

ऐसी लगी लगन भक्ति में हो मगन -भजन नं.१९

आयो देखो आया रे -भजन नं.२०

पंखिड़ा हो पंखिड़ा -भजन नं.२१

प्रभु गर्भ कल्याण में -भजन नं.२२

तीर्थंकर का महा -भजन नं.२३

मस्तकाभिषेक करो -भजन नं.२४

करो रे अभिषेक -भजन नं.२५

उत्सव बहुत मनाया जिनवर-भजन नं.२६

तुने नर तन को पाके -भजन नं.२७

इस जग में जन्मे -भजन नं.२८

सेना हो सेना -भजन नं.२९

भारत की कुछ -भजन नं.३०

सरजू नदी की धार -भजन नं.३१

मेरो सुदर्शन -भजन नं.३२

धरम के लिए -भजन नं.३३

सब दीपो में -भजन नं.३४

वंदे गिरिवरम-भजन नं.३५

गंगा के तट पर बसी हुई हस्तिनापुर नगरिया -भजन नं.३६

उत्सव बहुत मनाया जिनवर को भी रिझाया -भजन नं.३७

जैन धर्म के हीरे मोती -भजन नं.३८

जन्म मानव का पाया है जो -भजन नं.३९

जिन मंदिर का निर्माण -भजन नं.४०

जिनवर का महामस्तकाभिषेक निराला है -भजन नं.४१

कलश हाथों में लेकर -भजन नं.४२

सरे जग का तू सरताज -भजन नं.४३

आओ रे आओ रे सब मिलके आओ -भजन नं.४४

जनम जनम में पाऊँ जिनवर -भजन नं.४५

आओ करे चौबीस कल्पद्रुम की पूजा -भजन नं.४६

दुनिया में भगवंतों के मंदिर अनेक हैं -भजन नं.४७

स्वर्गों में बाज उठे बाजे -भजन नं.४८