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सुभाषचंद जैन के गाए भजन

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सुनलो प्रथा दहेज की

हे रत्नमती मात तुम्हे

दीक्षा लेकर बनी आर्यिका

में दीक्षा लेने

ज्ञानमती माताजी से पूछे जग सारा

धर्मप्रेमियों करो वंदना विदुषी सन्त महान की

हम सब ने मिलकर

तूने नर तन को पाकरके

राजा राणा छत्रपति

सुनलो प्रथा दहेज की

हम सब मिलकर आज

हे रत्नमती माता तुमने

भारत की कुछ ललनाओं ने

सरयू नदी की धार

ज्ञानमती माताजी से पूंछे जग सारा

मेरू सुदर्शन महातीर्थ को

दीक्षा लेकर बनी आर्यिका

सब दीपों में प्रथम जम्बूद्वीप

धरती का तुम्हें नमन हें

मैं दीक्षा लेने जाऊँगी

तीर्थ राज सम्मेदशिखर वंदना

सुमेरु वंदना संस्कृत

कुण्डलपुर तीरथ वंदना

तीर्थ राज सम्मेदशिखर टोंक

करो वंदना विधुशी संत महान की

इस जग में जो जन्मा

दयालु प्रभु से दया

मधुबन वाले पारस बाबा

धरम के लिए

वंदे गिरिवरम

हस्तिनापुर की महिमा