Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में विराजमान है ।

प्रतिदिन पारस चैनल के सीधे प्रसारण पर प्रातः 6 से 7 बजे तक प.पू.आ. श्री चंदनामती माताजी द्वारा जैन धर्म का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त करें |

हिंसक वस्तुएं जिन्हें नहीं खाना है

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

विषय सूची

हिंसक वस्तुए जिन्हें नहीं खाना है

आइसक्रीम का त्याग:

इसमें ५५% हवा तथा ३५ % गंदे पानी को पैसा देते हैं मांसाहारी अंग जैसे पशुओं के नाक, कान, गुदा के भाग जो कत्लखानों की फर्श पर दुर्गन्धयुक्त हालत में पड़े रहते हैं, इनसे आइसक्रीम की ऊपरी परत बनाई है ताकि मुंह में जाने के साथ चम्मच पर चिपका रहे, पिघले नही। साथ ही शक्कर, अण्डे, चर्बी का ऐसेंस मिलाया जाता है।

जिलेटिन का त्याग:

जिलेटिन जानवरों की हड्डियों, त्वचा और रेशों को उबालकर बनाया जाता हैं इसका प्रयोग दही, आइसक्रीम, जैम जैली, केक, शैम्पू, कास्मेटिक्स, दवाईयों आदि में होता है।

जैली का त्याग:

जैली का निर्माण भी जिलेटिन से ही होता हैं और जिलेटिन जानवरों की हड्डियों, चर्म, रेशों को उबालकर बनाया जाता हैं कुछ कम्पनियां वेजिटेबल गम से भी जैली बनाती हैं। हमेशा लेबल देखकर खरीदें ।

चॉकलेट का त्याग:

चॉकलेट में सामान्यत: जानवरों से प्राप्त तत्वों का सम्मिश्रण होता है , जैसे अंडे की जर्दी तथा जिलेटिन आदि ।टर्किंग डिलाई फ्रूट कांस, टॉफीज में जिलेटिन होता है । नेस्ले किटकेट काफरेनेट से बनती है ।यह रेनेट बछड़ों की अामाशय से मिलने वाले एसिड से बनता है ।

जैम का त्याग:

अधिकतर जैम्स में जिलेटिन का प्रयोग होता है जो मृत जानवरों की हड्डियों, रेशों, त्वचा को उबालकर बनाया जाता है।

वारसेस्टर सोस:

इसमें एनकोविल नामक छोटी-छोटी मछलियों का चूर्ण मिलाया जाता हैं।

शैलेक का त्याग:

यह कीड़ों की मृत का या कलेवर होता है। ३३३ ग्राम शैलेक के निर्माण में लगभग १००००० कीड़ों को मारा जाता है। इसका प्रयोग वैडबरी कम्पनी के जेम्स व नटीज मे मुख्यत: से किया जाता है। सामान्यतह यह अन्य उत्पादों में भी होता है।

शैम्पू का त्याग:

कुछ किस्म के शैम्पुओं में अंडे मिलाये जाते हैं। शैम्पू को हानिकारक परीक्षण के लिए खरगोश की ऑखों में डाला जात है जिससे लाखों खरगोश अंधे होकर मर जाते हैं।

सिल्क ऑयल पाउडर का त्याग:

रेशम के कीड़ों को मारक प्राप्त किया जाता है। इसका प्रयोग बाल और त्वचा को चमकाने वाले कॉस्मेटिक पदार्थो में किया जाता है। जैसे: शैम्पू और पाऊडर आदि।

सोने व चांदी के वर्व का त्याग:

चांदी की पत्ती को गाय या भैंस की ताजा आँत में रखकर वूâटकर बनाया जाता है इसका प्रयोग मिठाई, पान सुपारी आदि में किया जाता है।

अजीनों मोटो का त्याग:

यह मछली से बनता है। इसका उपयोग सॉस, चाऊमीन, सेंडविच और अन्य चायनीज खाद्य साम्रगी में होता है।

चीज का त्याग: यह सामान्यत:

दो सप्ताह से कम आयु के बछड़ों के आमाशय से मिलने वाले एसिड से बनाया जाता हैं इसका प्रयोग दूध से चीज बनाने में होता है। इस एसिड के लिए लाखों बछड़ो को मार दिया जाता हैं।

च्युइंगम का त्याग:

च्युइंगम में पशुओं से प्राप्त होने वाला ग्लिसरीन, जिलेटिन आदि आवश्यक रूप से मिला होता है जानकारी करने के लिए इसका लेबल पढ़ सकते हैं।

चिप्स का त्याग:

बाजार में उपलब्ध कुछ प्रकार की चिप्सों को पशुओं की चर्बी मे तला जाता है पैकेट पर ध्यान दें कि इन्हे वेजीटेबिल ऑयल में तला है या नहीं।

ग्लिसरीन का त्याग:

अधिकांश ग्लिसरीन मृत जानवरों को उबालकर प्राप्त की जाती है। जिसका सर्वाधिक उपयोग कॉस्मैटिक्स, खाद्य पदार्थो, टूथपेस्ट,माऊथवाश, च्युइंगम, दवाओं व साबुनों आदि में होता है।

सनटैन ऑयल का त्याग:

यह ऑयल कछुओं को मारकर प्राप्त किया जाता है। टूथपेस्ट, टूथ पाऊडर अधिकतर टूथ पेस्ट में ग्लिसरीन (जो मृत जानवरों से प्राप्त होती हैं।) मिलायी जाती हैं एवं वैल्शियम फास्पेट के लिए मृत जानवरों की (हड्डियों) का चूरा मिलाया जाता है, जो दांतों को चमकाता है।

बोनचायना क्रॉकरी का त्याग:

बोन यानि हड्डी अर्थात जो हड्डी को बारीक पीसकर सॉचे में ढालकर फूलपत्ती प्रिंट कर तथा भट्टी में पकाकर आपके सामने चमकदार कप,प्लेट, डायनिंग सेट, आते हैं और उसको साफ करने के लिए बोन (हड्डी) पाउडर भी आता है।

चाय, काफी का त्याग:

चाय के अंदर इस प्रकार के जहर होते है जैसे टेनिन, वैपिन आदि।चाय, काफी से भूख मर जाती है और यह एक प्रकार का नशा है जो लगता हैं तो छूटता नहीं है, चाय से नींद न आना, स्मृति नष्ट होना आदि रोग होते हैं। कुछ चायों में फ्लेवर के रूप में पशुओं का खून मिलाया जाता है।

धूम्रपान का त्याग:

तम्बाकू में निकोटिन रहता है जिससे व्यक्ति को पीने आदत पड़ जाती हैं तथा निकोटिन एक जहरीला पदार्थ है जो व्यक्ति के पेâफड़ो को खराब कर देता है और वैंâसर की संभावना बढ़ जाती हैं।

पान-मसाला, गुटका का त्याग:

मादकता उत्पन्न करने के लिए छिपकली की पूंछ का प्रयोग किया जाता हैं धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाता हैं और बाद में गले तथा गालों पर वैंसर के फोडें पड़ जाते हैं।

साबुदाना का त्याग:

यह शकरकंद को उबालकर उसके घोल उसके घोल को महीनों तक बड़े-बड़े गड्ढों में सड़ाया जाता हैं इस प्रक्रिया में असंख्यात कीड़े इसके साथ सड़ जाते हैं। इसी से साबुदाना बनाया जाता हैं इसे पहले पैंरों से रौंध कर पेस्ट बनाया जाता हैं तथा बाद में पाऊडर चढ़ाकर दाना बनाया जाता है।

चमड़े का त्याग :

पशु को चार दिन तक भूखा रखा जाता है बाद में २०० डिग्री सें.ग्रे. का खौलता पानी डाला जाता है ताकि खाल मुलायम बनी रहे। बाद में इसके पेट में हवा भरी जाती है जिससे पेट फूल जाता है और चमड़ी आसानी से निकल आती है।

रेशम का त्याग:

रेशम उत्पादन में लाखों कीड़ों को खौलते गर्म पानी में डालकर उबाला जाता है। एक रेशमी साड़ी में ५००० कीड़ों का उपयोग किया जाता है।

कस्तूरी का त्याग :

इत्र फुलेल आदि सुगंधित पदार्थ बनाने के लिए कस्तूरी प्राप्ति हेतु मृग मार दिये जाते हैं।

नेलपालिश का त्याग :

इसमें जानवरों का खून मिलाया जाता है। व्हेल मछली को भी मारा जाता है।

लिपिस्टिक का त्याग:

लिपिस्टिक के उत्पादन में मोम का प्रयोग होता है जो मधुमक्खियों के छत्तों से प्राप्त होता है इसमें चमक हेतु सुअर की चर्बी मिलाई जाती है।

सेन्ट का त्याग :

सेन्ट उत्पादन के लिए हजारों बिज्जू मारे जाते हैं। बिज्जू को बेतों से मारा जाता है तथा चाकु से खरोंचा जाता है।

कोसे का त्याग :

रेशम के हजारों कीड़ों को उबालकर कोसे का वस्त्र बनता है।१०० जी.एम.कोसा·१५००० कीड़े।

केप्सूल का त्याग :

केप्सूल जिलेटिन नामक पदार्थ से बनती है। जिलेटिन हड्डियों, खुरों व पशुओं की झिल्लियों को उबालकर प्राप्त किया जाता है।

हाथी दांत का त्याग :

हाथी दांत प्राप्त करने के लिए लाखों हाथियों को जहर देकर मारा जाता है इन हाथी दांतो से चूड़ियां व बच्चों के खिलौने एवं अन्य आभूषण निर्मित किये जाते हैं।

पुताई के ब्रश का त्याग :

नई किस्म के रंगाई ब्रश, हेयर ब्रश, कलाकारी ब्रश बनाने के लिए सुअरों की भौहें पलकों व शरीर के बालों को नोच लिया जाता है।

सिन्थेटिक कत्था :

इसके निर्माण में अरारोट, लाल रंग, मुलतानी मिट्टी जूते की पॉलिश एवं पशुओं के सूखे हुये खून का प्रयोग किया जाता है।

शहद का त्याग :

शहद यूं तो सामान्यत: मधुमक्खियों का उबाल माना जाता हैं परंतु वर्तमान में ज्यादा एवं शीघ्र शहद प्राप्त करने के लिए मधुमक्खियों को भी छत्तों सहित निचोड़ दिया जाता है।

शीतल पेय कोल्ड ड्रिंक का त्याग :

बाजार में उपलब्ध सभी शीतल पेय पदार्थो में गलाईसेरोल मिला दिया जाता है जो मृत जानवरों से प्राप्त होता है। साथ ही इसमें कार्बोलिक अम्ल, फास्फोरिक अम्ल, बेन्जोइन रसायन साइट्रिक एसिड मिठास के लिए एम्परटेम क्रीम एवं ज्यादा समय तक खराब न होने से बचाव के लिए सोडियम बेन्जोएट जैसे केमिकल्स का प्रयोग होता है जो व्यक्ति को वैंसर व ऑतों की सड़न जैसी बीमारियों का तोहफा देती हैं। एक शोध के अनुसार बाजार में उपलब्ध सभी शीतल पेयों में हानिकारक कीट नाशक मौजूद हैं। जिन्हे फसलों में कीड़ मारने और टॉयलेट में कीटाणु मारने में उपयोग किया जाता है।मिरिन्डा में ३० गुना, कोकाकोला में ७५ गुना, पेन्टा में ४३ गुना, पेप्सी में २५ गुना, डाइट पेप्सी में १४ गुना, स्प्राईट में ११ गुना, लिम्का में ३० गुना थम्सअप में २५ गुना अधिक मात्रा में हानिकारक कीटनाशक सिर्प भारतीय बाजार में उपलब्ध कोल्ड ड्रिंक में ही मौजूद हैं, अमेरिका में उपलब्ध पेयों में इनकी मात्रा शून्य है।

मोती का त्याग :

मोती के निर्माण में केल्शियम कार्बाइड का प्रयोग कर सीप के अन्दर आयस्टर नामक जीव की हत्या की जाती है और कृतिम मोती निर्माण में मछलियों के चमड़े के छिलके का उपयोग किया जाता है छिलका वूâटकर रस का निर्माण होता है जो कांच की मणियों पर लगाने से वह मोती जैसा चमकता है।

शटलकॉक का त्याग :

बेडमिन्टन के खेल में प्रयुक्त शटलकॉक (चिड़िया) के पंखो के लिए लाखों बतखों को मार दिया जाता है। साथ ही इसके पीछे की पेन्दी में लगे काक्र्स में चमड़े को लपेटा जाता है इसके पंखों को धागे से बांध देने के बाद जिलेटिन का घोल चढ़ाया जाता है जिसके लिये हजारों पशुओं की हत्या कर दी जाती है।

नींबू का सत (टाटरी) मांसाहारी है:

नींबू का सत नींबू से नहीं बनता। शक्कर का वेस्टेज पदार्थ सीरा में २५० ग्राम विशेष प्रकार के जीवाणु डाले जाते है वे इस सीरा को खाते है। निहार (मल) के रूप में खट्टा पदार्थ निकालते है यह प्रक्रिया ७ दिनो तक चलती रहती है और जीवों की संख्या असंख्य हो जाती है बाद में गर्म भाप से निकाला जाता है तो मरे जीवों का लोंदा इकट्ठा हो जाता है बाद में मशीन से बारीक क्रिस्टल बनाये जाते हैं अत: यह नींबू का सत (फूल) मांसाहारी है।

कृत्रिम घी का त्याग :

यह पूर्ण रूप से जानवरों की चर्बी, रिफान्ड तेल का होता है जिसमें खुश्बू के लिए जर्मन से आयात कृत्रिम एसेन्स डाला जाता है तथा ज्यादा समय तक बनाये रखने के लिए कीटनाशक का भी समावेश किया जाता है बाजार मे ८० यही घी उपलब्ध है।

एलबुमेन का त्याग :

इसे अण्डे की जर्दी कह सकते हैं जिसका प्रयोग मिठाईयां ब्रेड में किया जाता है मिठाई व ब्रेड पर पड़ने वाली परत इस एलबुलेन की देन होती है। यह बर्गर में ऊपर चिकनापन बनाने मे किया जाता है तथा उस पर तिल के दाने चिपका देते हैं।ताकि देखने में अच्छा लगे।

रेडिमेड आटा का त्याग :

कुछ मशहूर ब्राण्ड के रेडीमेड आटे में मछलियों का चूर्ण या हड्डियो का पाऊडर मिलाया जाता है इसके लिए समुद्र के किनारे पर लहरें आती तथा वापिस चली जाती हैं लेकिन छोटी-छोटी मछलियॉ किनारे पर ही रह जाती हैं। उन्हे बाद में धूप में सुखा कर पीस लिया जाता है फिर आटा-नमक आदि में मिलाया जाता है ताकि जायका-स्वाद कुछ भिन्न ही आये।

ब्रेड बिस्कुट-टोस्ट :-

डबलरोटी-पाव-नान खटाई आदि बेकरी का त्याग : यह बस मैदे से बनती है जिसमें लाखो जीव रहते हैं। तथा पेट का पाचन तंत्र खराब हो जता है अनेक ब्रांड के ब्रेड, केक, चाकलेट बनाने में अण्डा और जिलेटिन का प्रयोग किया जाता है खाद्य पदार्थ मिलावट प्रतिबंधक नियम अ-१८/०७ के अनुसार आइसक्रीम की तरह बिस्किट में अंडो का मिश्रण करने पर उसकी सूचना अथवा विज्ञान भी जारी करना अनिवार्य नहीं हैं।

मेडिकर का त्याग :

जुए मारने वाले तरल पदार्थ के उपयोग से मस्तिष्क का वैंसर हो जता हैं तथा असंख्यात त्रस जीवों की हिंसा का पाप लगता है।

इन्सुलिन का त्याग:

मधुमेह (डायविटीज) के रोगियों को दिया जाने वाला इन्सुलिन गाय, बछड़ा बैल, भेड़ और सुअर के पेन्क्रियाज में से प्राप्त किया जाता है। इस कारण बहुत से पशुओं को मौत के घाट उतार दिया जाता है।

नहाने को साबुन का त्याग :

दैनिक उपयोग में आने वाले कई ब्राण्डों के साबुन में चर्बी मिलाई जाती है।

टूथ पाउडर का त्याग :

कई टूथ पाउडर में हड्डी अन्य अशुद्ध पदार्थ मिलाये जाते हैं जिससे दांतों में चमक बनी रहती है।

टूथ पेस्ट का त्याग :

कई टूथ पेस्टों मे चर्बी मिलाई जाती है। प्रत्येक टूथ पेस्ट मे सर्बिटोल, सोडियम लारिल सल्पेट, क्लोराइड मिलाया जाता है। क्लोराइड सरासर घातक विष है तथा केल्शियम फास्पेट होता है जो जानवरों की हड्डियां को पीसकर बनाया जाता है। कुछ टूथ पेस्टों में ग्लिसरीन का भी उपयोग किया जाता है जो जानवरों से प्राप्त किया जाता है।

पोलो-मिंट-मिंटोप्रेश का त्याग :

इनमें कई गाय की चर्बी मिलाई जाती है जिससे मांसाहार का दोष लगता है।

फिल्टर का पानी का त्याग:

आदि फिल्टरों में पानी को साफ करने के लिए गाय की हडिडयों का चूरा (एक्टिवेटेड चारकोल) डाला जाता है जिससे पानी साफ होता है तथा स्वाद अलग ही आता है।

सिन्थेटिक दूध, मटठा का त्याग:

इसमें यूरिया (खाद) रिफाइन्ड तेल, डिटरजेन्ट, शक्कर, नमक, सतरीठा, अरारोट, पाऊडर तथा बबूल की गोंद मिलाई जाती है।

पेस्ट्रीज (ब्रेक समोसा का त्याग):

पेस्ट्रीज रूप से अण्डे का उपयोग किया जाता है अण्डे की पालिश से ही पेस्ट्रीज में करारापन आता है। अण्डे की पालिश ऐसा करना संभव नहीं है और आज कल बाजार में विविधता के रूप में चिकन पेस्ट्रीज भी उपलब्ध है जो पूर्ण रूप से मांस से ही निर्मित होती है।

(यदि आप खुद को और दुनिया को इन घिनौनी सच्चाइयों को

बतलाना चाहते हैं तो शुरुआत अपने उपयोग में आ रही
चीजों से कीजिए। निर्माताओं और वितरकों को लिखिए।

सच्चाइयों को सामने लाइए। आपका प्रयास चमत्कार करेगा)