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हृदय अधिक धड़कने की दवा

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हृदय अधिक धड़कना

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हृदय गति अवरुद्ध ना होना अर्जुन की छाल, सोंठ, काली मिर्च, दालचीनी, इलायची, शक्कर, सबको चाय की तरह बनाकर थोड़ा दूध डालकर रोज पीने से हृदय का रोग नहीं बनता है।

हृदय अधिक धड़कना अर्जुन वृक्ष की छाल का चूर्ण जीभ पर रखकर चूसें, दिल की कमजोरी धड़कन में लाभ होगा।

खून बढ़ाने एक गिलास पानी में नींबू निचोड़कर उसमें २५ ग्राम किसमिश डाल दें और खुले स्थान ढककर रखें, प्रात: किसमिस खाते जायें, पानी पीते रहें, रक्त की कमी ठीक होगी।

दुर्बलता एवं खूनवृद्धि १० ग्राम गेहूँ को रात में पानी में भिगों दें, सुबह पानी हटाकर दूसरा पानी डालकर खूब बारीक पीस लें, फिर कपड़े से छानकर ऊपर का चोकर फेकें तथा नीचे के पानी को सिजाकर १ उफान लायें उसमें थोड़ा घी, दूध एवं चीनी डालकर पिलावें, यदि चीनी माफिक ना पड़े तो नमक डाल दें कम से कम ३ माह लेवें। सूखा रोग, दुबलापन, खून की कमी आदि रोग दूर हो जायेंगे।

पुष्टिकारक ग्वारपाटे को छीलकर अंदर का गूदा निकालकर इसको ३—४ चम्मच सुबह खाली पेट पीने से दिन भर शरीर में शक्ति और चुस्ती फुर्ती बनी रहती है थकान नहीं होती।

उच्च रक्तचाप शरीर में रक्त का संचालन हृदय धमनियों द्वारा करता है। जब रक्त धमनी में आता है तब उसकी दीवारें भी दबाव देकर रक्त संचालन में सहायता करती हैं। कभी—कभी धमनी की दीवार मोटी होकर अपना लचीलापन नष्ट कर देती है, तब हृदय को अधिक जोर से दबाव डालकर रक्त भेजना पड़ता है। उस अतिरिक्त दबाव या चाप को रक्तचाप कहते हैं। दिल का दौरा, धड़कन बन्द होना, मस्तिष्क का पक्षाघात (लकवा), गुर्दे बेकार होना, दृष्टिपटल में खराबी, मृत्यु ये सब उच्च रक्तचाप के कारण होता है।

उच्च रक्तचाप के लक्षण सिर दर्द, जी मिचलाना व सिर चकराना, थकावट, सामान्य दर्द व पीड़ा, सामान्य से तेज हृदय व नाड़ी की धड़कन। उच्च रक्तचाप अपने आपमें बहुत बार कोई लक्षण नहीं दर्शाता। ३५ वर्ष की उम्र के पश्चात् यदि उच्च रक्तचाप हो जाए तो हृदय, नेत्र और गुर्दों की नियमित जाँच समय—समय पर होनी चाहिए विशेषकर जब परिवार की उच्च रक्तचाप की पृष्ठभूमि हो या आप ऐसे वर्ग के हो; जहाँ तनावपूर्ण जीवन एक सामान्य बात हो।

उच्च रक्तचाप के कारण गुर्दे की खराबी, तनाव, अशांति, व्यस्तता, अधिक वजन व मोटापा, धूम्रपान।

रक्तचाप उच्च रक्तचाप हो तो चिकित्सक के परामर्श से भोजन व व्यायाम करें। सदैव संतुलित, नियमित, नियंत्रित व कम नमक वाले भोजन का सेवन करें। योगासन (श्वासन) लाभप्रद होता है। तनाव, क्रोध से बचिए, शांत जीवन व्यतीत कीजिए। रात्रि में ९ घंटे की पूरी नींद लीजिए। दिन में भोजन के बाद कुछ समय सोयें। दिन भर में आधा से एक ग्राम नमक लें। हर सातवें दिन तरल लें। इस रोग में उपवास लाभप्रद है। सप्ताह में एक दिन उपवास करें। उपवास में फलों, सब्जियों का रस लें। लौकी का रस आधा कप पानी मिलाकर लेने से लाभ होता है। केले के तने का रस आधा कप दो बार नित्य पीने से बढ़ा हुआ रक्तचाप सामान्य हो जाता है। प्रतिदिन प्रात:काल एक पपीते का सेवन करें तो कुछ ही दिनों में रक्तचाप की पीड़ा कम हो जाती है। इसे औषधि मानकर सेवन करें। इसमें पोटेशियम तत्व बहुत अधिक मिलते हैं। ककड़ी का रस पीना, उच्च और निम्न दोनों रक्तचापों के लिए लाभप्रद है। उच्च रक्तचाप को टिण्डा कम करता है। पेशाब लाता है। रक्तचाप दो तरह का होता है निम्न और उच्च रक्तचाप। ५० ग्राम देशी चना, २०—२५ दाने किशमिश को रात में भिगो दें, प्रात: उठकर इनका सेवन कर वही पानी पी लें। निम्न रक्तचाप ,उक्त रक्तचाप में रोज नींबू मिला पानी पीजिए। निम्न रक्तचाप में मीठे बेदाना का रस ताजा रोज दो बार १—१ गिलास लें, २—३ सप्ताह में यह ठीक हो जायेगा। उक्त रक्तचाप में रोज मालिश करके करेला का रस पीना चाहिये, नमक का उपयोग कम करें। उच्च रक्तचाप से छुटकारा पाने के लिए हमेशा मूली खायें उसमें नमक आदि कुछ भी ना मिलाया जाय।

हाई ब्लडप्रेशर अश्वगंध, सर्पगंध, अर्जुन की छाल, ब्राह्मी की पत्ती, शंखपुष्पी इनको समान मात्रा में लेकर इनके बराबर आंवला लेकर चूर्ण बनाकर दो ग्राम चूर्ण रोज पानी में खाली पेट फांक लेने से हाई ब्लडप्रेशर ठीक होता है।

लो ब्लडप्रेशर में

कच्चे केलों का उपयोग किसी भी रूप में प्रतिदिन करने से ठीक हो जाता है। प्रेशर ही लो नहीं होता।