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००८. जिन’ जिनेन्द्रदेव का लक्षण करते हुये श्रीपूज्यपाद स्वामी स्तुति करते हैं।

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जिन’ जिनेन्द्रदेव का लक्षण करते हुये श्रीपूज्यपाद स्वामी स्तुति करते हैं।

जितमदहर्षद्वेषा, जितमोहपरीषहा जितकषाया:।

जितजन्ममरणरोगा, जितमात्सर्या जयन्तु जिना:।।१०।।
मद अरु हर्ष द्वेष के विजयी, मोह परीषह के विजयी।
महा कषाय भटों के विजयी, भव कारण के अतःजयी।।
जन्म-मरण रोगों को जीता, मात्सर्यादिक दोषजयी।
सबको जीत कहाए तुम ‘जिन’, अतः रहो जयशील सही।।१०||
                           मुनिचर्या-ईर्यापथ शुद्धि से