Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


दिव्यशक्ति ब्राह्मी-सुंदरी स्वरूपा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास अवध की धरती जन्मभूमि टिकैतनगर में 15-7-19 से प्रारंभ हुआ |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

०५१.तीर्थंकरों के आहार के समय रत्नवृष्टि

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


तीर्थंकरों के आहार के समय रत्नवृष्टि

सर्वेषामदिभिक्षासु दातारोऽपि जिनेशिनाम्।

सर्वासु वर्धमानस्य वसुधारानियोगतः।।२४९।।
अर्धत्रयोदशोत्कर्षाद्वसुधारासु कोट्यः।
तावन्त्येव सहस्राणि दशघ्नानि जघन्यतः।।२५०।।


समस्त तीर्थंकरों की आदि पारणाओं और वर्धमान स्वामी की सभी पारणाओं में नियम से रत्नवृष्टि हुआ करती थी वह रत्नवृष्टि उत्कृष्टता से साढ़े बारह करोड़ और और जघन्यरूप से साढ़े बारह लाख प्रमाण होती थी ।।२४९-२५०।।(हरिवंशपुराण, सर्ग—६०, पृ. ७२४)