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दिव्यशक्ति ब्राह्मी-सुंदरी स्वरूपा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का मंगल चातुर्मास अवध की धरती जन्मभूमि टिकैतनगर में 15-7-19 से प्रारंभ हुआ |

पारस चैनल पर प्रातः ६ से ७ बजे तक देखें जिनाभिषेक एवं शांतिधारा पुन: ज्ञानमती माताजी - चंदनामती माताजी के प्रवचन ।

०५. मंगल आशीर्वाद

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मंगल आशीर्वाद

-चारित्रश्रमणी आर्यिका श्री अभयमती माताजी
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पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर एवं इससे सम्बद्ध तीर्थों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अत्यन्त दूरदर्शिता रखते हुए जम्बूद्वीप तीर्थ पर सन् १९८७ में पीठाधीश पद की स्थापना की है। मुझे विश्वास है कि विगत २४-२५ वर्षों से जिस प्रकार इस धर्मपीठ का कुशल संचालन प्रथम पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज के निर्देशन में हुआ है, उसी प्रकार भविष्य में भी सैकड़ों वर्षों तक इस धर्मपीठ के पीठाधीशगण सारे विश्व में जैनधर्म की अद्भुत प्रभावना एवं तीर्थों का संरक्षण करते रहेंगे। वर्तमान में इस पीठ पर पूज्य माताजी ने ब्र. रवीन्द्र कुमार जी को प्रतिष्ठापित करके उन्हें ‘‘स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी’’ बनाया है अत: मुझे इस बात की अत्यन्त प्रसन्नता है। १८ वर्ष की उम्र से ही स्वामी जी को पूज्य माताजी के संस्कार प्राप्त हुए हैं अत: वे अपने इस नये पीठाधीश कार्यकाल में भी इस संस्थान का सर्वतोमुखी संचालन करके धर्म प्रभावना आदि के महनीय कार्य कर रहे हैं। आगे अपने चरम लक्ष्य की पूर्ति करते हुए वे अपने सम्पूर्ण मानव जीवन के शिखर पर कलशारोहण करें, यही उनके लिए मेरा बहुत-बहुत मंगल आशीर्वाद है।