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१४०६ वर्ष प्राचीन भूगर्भ से प्राप्त १३ फणी कलिकुण्ड पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा

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१४०६ वर्ष प्राचीन भूगर्भ से प्राप्त १३ फणी कलिकुण्ड पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा

लेखक: महेन्द्र कुमार जैन ‘भगतजी’

उत्तर प्रदेश का बागपत जो कि एक नदी किनारे बसा हुआ है, पुराना कस्बा बागपत के नाम से सुप्रसिद्ध है जो प्राचीन काल में पाण्डवों के पाँचवे पुत्र नरेश सहदेव की राजधानी वणिकपथ बागपत के नाम से सुविख्यात था। उत्तर भारत के चार प्राचीन चैत्यालयों में से एक प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर के प्राचीन अवशेष के रूप में यहाँ पर मौजूद है। सैकड़ों वर्षों से यह स्थान एक जैन मंदिर खण्डहर के रूप में पड़ा है। वर्षों पूर्व जैन मंदिर खण्डहर के अवशेष में से एक चतुर्थ कालीन भगवान श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जो वर्तमान में जिला बागपत से एक किलोमीटर दूर सिसाना ग्राम के श्री दिगम्बर जैन मंदिर में विराजमान है, जो उस समय स्थानांतरित की गई थी। पुराने जैन मंदिर के अवशेष वर्तमान में भी देखने को मिलते हैं। यहाँ एक बड़ा अतिशय है कि देवों की भूमि होने के कारण कोई भी व्यक्ति वर्षों में खाली पड़ी होने के बाद भी इस देव भूमि को अपने अधिकार में नहीं कर सका। यहाँ पर रहने वाले पड़ोस के लोग बताते हैं कि रात में घुंघरूओं और घण्टों के बजने की आवाजें आती रहती हैं। और जब वहाँ के निवासी पीपल देवजा को दीपक जलाते हैं। यहाँ से चन्दन घिसने की एक शिला एवं एक पत्थर की चौकी भी प्राप्त हुई है। जिला बागपत के सिसाना ग्राम में विराजमान चतुर्थ कालीन भगवान चंद्रप्रभु की श्वेत वर्ण पद्मासन मूलनायक प्रतिमा अत्यंत मनोहारी व चमत्कारी है, जो शुद्ध मन से व भावों से दर्शन, पूजन, चिन्तन मनन करते हैं, उनके बिगड़े हुए काम भी पूर्ण व सफल हो जाते हैं। यहाँ के ग्राम निवासियों का कहना है, कि भूतकाल में कई बार इस दिगम्बर जैन मंदिर में चोरों ने चोरी का प्रयास किया, किन्तु गर्भगृह तक पहुँचने के बाद भी ऐसा आश्चर्यकारी चमत्कार होता था कि चोर भी अपना सारा सामान मंदिर की दहलीज पर रखकर खाली हाथ चले जाते थे और श्री मंदिर जी की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हो पाता था। ग्राम वासियों का कथन है कि इस स्थान पर पहले किसी ने मूत्र त्याग कर दिया था, तो अग्नि प्रज्ज्वलित हो गई थी, इस स्थान के आगे दरवाजे पर कोई पड़ोसी गर्मी में सो गया तो रात में देवों ने उसे उठाकर वहाँ से हटाया । श्री १००८ कलिकुण्ड पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र बागपत की मूर्ति १४०६ वर्ष प्राचीन, १३ फणी कलिकुण्ड भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा दिनांक २६-११-२०१३ को भूगर्भ से प्राप्त हुई है। इस प्रतिमा में तेरह फण हैं और इस पर संवत् ११३४ अंकित है और पीली धातु की है।

'‘‘सन्मति वाणी’’ जुलाई २०१४