ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

007.श्री वीरसागर महाराज का परिचय-एक दृष्टि में

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
श्री वीरसागर महाराज का परिचय-एक दृष्टि में

(संस्कृत टीकाकत्र्री पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के दीक्षागुरु)

स्वस्ति श्री मूलसंघ में कुन्दकुन्दाम्नाय, सरस्वती गच्छ, बलात्कारगण में बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बर जैनाचार्य चारित्रचक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टशिष्य आचार्यश्री वीरसागर महाराज हुए हैं। उनका संक्षिप्त परिचय निम्न प्रकार है-

जन्म -आषाढ़ शु. १५, सन् १८७६, वि.सं. १९३३

ग्राम -ईर (जि.-औरंगाबाद, महाराष्ट्र)

नाम -हीरालाल

गोत्र -गंगवाल

पिता -श्री रामसुख जैन

माता -श्रीमती भाग्यवती जैन (भागू बाई)

क्षुल्लक दीक्षा -फाल्गुन शु. ७, सन् १९२३ (वि.सं. १९८०)

नाम -श्री वीरसागर महाराज

मुनिदीक्षा -आश्विन शु. ११, सन् १९२४ (वि.सं. १९८१)

ग्राम -समडोली-महाराष्ट्र

दीक्षागुरु -चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज

आचार्य पद घोषणा -कुंथलगिरि में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज द्वारा प्रथम भाद्रपद शु. ७, सन् १९५५ (वि.सं. २०१२)

आचार्यपदारोहण -द्वि. भाद्रपद कृ. ७, सन् १९५५ (वि.सं. २०१२)

स्थान -खानिया-जयपुर (राज.)

समाधिमरण -आश्विन कृ. अमावस्या, सन् १९५७ (वि.सं. २०१४)

स्थान -खानिया-जयपुर (राज.)