ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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01.प्राण

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प्राण

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जिसके सद्भाव से जीव में जीवितपने का और वियोग होने पर मरणपने का व्यवहार है, उनको प्राण कहते हैं। प्राण के दस भेद हैं-स्पर्शन आदि पाँच इन्द्रियाँ, मनोबल, वचनबल, कायबल, (ये तीन ) आयु और श्वासोच्छ्वास ये दस प्राण हैं। एकेन्द्रिय जीव के स्पर्शन इन्द्रिय, कायबल, आयु और श्वासोच्छ्वास ये चार प्राण होते हैं। दो इन्द्रिय जीव के रसना इन्द्रिय और वचनबल के बढ़ जाने से छह होते हैं। तीन इन्द्रिय जीव के एक घ्राण इन्द्रिय बढ़ जाने से सात, चार इन्द्रिय जीव में चक्षु इन्द्रिय बढ़ जाने से आठ, असैनी पंचेन्द्रिय में कर्णेन्द्रिय बढ़ जाने से नव तथा सैनी पंचेन्द्रिय जीव में मनोबल के बढ़ जाने से दस प्राण होते हैं।