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01. मंगलशान्ति जिनस्तवन

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मंगलशान्ति जिनस्तवन




समग्रतत्वदर्पणम् विमुक्तिमार्गघोशणम्
कशायमोहमोचनं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।1।।नमामि....

त्रिलोकवन्द्यभूशणं भवाब्धिनीरषोशणं
जितेन्द्रयं अजं जिनं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।2।।

अखण्डखण्डगुणधरं प्रचण्डकामखण्डनं
सुभव्यपदिनकरं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।3।।

एकान्तवादमतहरं सुस्याद्वादकौषलं
मुनीन्द्र्रवृन्दसेवितं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।4।।

नृपेन्द्रचक्रमण्डनं प्रकर्मचक्रचूरणं
सुधर्मचक्रचालकं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।5।।

अग्रन्थनग्नकेवलं विमोक्षधामकेतनं
अनिश्टघनप्रभत्र्जनं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।6।।

महाश्रमणमकित्र्चनं अकामकामपदधरं
सुतीर्थकर्तृशोडषं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।7।।

महाव्रतन्धरं वरं दयाक्षमागुणाकरं
सुदृश्टिज्ञानव्रतधरं नमामि षान्तिजिनवरम् ।।8।।नमामि...