Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


डिप्लोमा इन जैनोलोजी कोर्स का अध्ययन परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक प्रतिदिन पारस चैनल के माध्यम से कराया जा रहा है, अतः आप सभी अध्ययन हेतु सुबह 6 से 7 बजे तक पारस चैनल अवश्य देखें|

ॐ ह्रीं सोमग्रहारिष्टशांतिकराय श्री चन्द्रप्रभ जिनेन्द्राय नम:।

01. विश्व की शान: भगवान् ऋषभदेव और वर्द्धमान

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


विश्व की शान- भगवान् ऋषभदेव और वर्द्धमान

—डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन्
(भारत के राष्ट्रपति)
Scan Pic0001 1.jpg

भारतीय साहित्य में अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं जो बताते हैं कि बहुत पहले से ही, प्रथम शताब्दी (ईसा पूर्व) से ही ऐसे लोग थे जो ऋषभदेव प्रथम तीर्थंकर की उपासना करते थे। इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं कि वर्द्धमान अथवा पार्श्वनाथ के पूर्व से ही जैनधर्म प्रचलित था ।
यजुर्वेद में ऋषभ, अजितनाथ एवं अरिष्टनेमि तीन तीर्थंकरों के नाम उल्लिखित हैं ।
भागवत् पुराण इस विचार का समर्थन करता है कि ऋषभदेव जैनधर्म के प्रवर्तक थे ।