ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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01. विश्व की शान: भगवान् ऋषभदेव और वर्द्धमान

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विश्व की शान: भगवान् ऋषभदेव और वर्द्धमान

—डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन्
(भारत के राष्ट्रपति)
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भारतीय साहित्य में अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं जो बताते हैं कि बहुत पहले से ही, प्रथम शताब्दी (ईसा पूर्व) से ही ऐसे लोग थे जो ऋषभदेव प्रथम तीर्थंकर की उपासना करते थे। इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं कि वर्द्धमान अथवा पार्श्वनाथ के पूर्व से ही जैनधर्म प्रचलित था ।
यजुर्वेद में ऋषभ, अजितनाथ एवं अरिष्टनेमि तीन तीर्थंकरों के नाम उल्लिखित हैं ।
भागवत् पुराण इस विचार का समर्थन करता है कि ऋषभदेव जैनधर्म के प्रवर्तक थे ।