ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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02.उत्तम मार्दव धर्म की प्रश्नोत्तरी

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विषय सूची

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दशधर्म प्रश्नोत्तरी

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उत्तम मार्दव धर्म की प्रश्नोत्तरी

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[सम्पादन] प्रश्न.१ - मार्दव का क्या अर्थ है ?

उत्तर - मानरूपी शत्रु का मर्दन करना अर्थात् नाश करना एवं परिणामों में मृदुता- कोमलता का भाव होना मार्दव कहलाता है।

[सम्पादन] प्रश्न.२ - यह मार्दव गुण कितने प्रकार के मद से रहित होता है?

उत्तर - यह मार्दव गुण आठ प्रकार के मद से रहित होता है । उन आठ मदों के नाम इस प्रकार हैं - जाति , कुल, बल, ऐश्वर्य, रूप, तप, विद्या और धन

[सम्पादन] प्रश्न.३ - मार्दव धर्म की और क्या विशेषता है ?

उत्तर - यह धर्म चार प्रकार की विनय से संयुक्त होता है- ज्ञानविनय, दर्शनविनय, चारित्रविनय और उपचार विनय।

[सम्पादन] प्रश्न.४ - किस रानी ने रूप के मद में उन्मत्त होकर क्या अकार्य किया ? इसका उसे क्या कुफल मिला ?

उत्तर - सिंधुमती रानी ने रूप के मद में उन्मत्त होकर एक दिगम्बर मुनिराज को कड़वी तूमड़ी का आहार दे दिया जिसके फलस्वरूप उसे इस लोक में राजा द्वारा अनेकों दण्ड प्राप्त हुए तथा अनेक भवों में नरक-तिर्यञ्च के दुःख भोगने पड़े।

[सम्पादन] प्रश्न.५ - ‘‘भूप कीड़ों में गया’’ दशलक्षण पूजा की इस पंक्ति का क्या तात्पर्य है ?

उत्तर - मिथिलानगर के राजा को आर्तध्यान के निमित्त से किसी समय तिर्यंचायु का बंध हो गया। निमित्तज्ञानी मुनिराज से पूछने पर उन्होंने बताया कि मृत्यु के पश्चात् तुम अपने विष्ठागृह में पंचरंगी कीड़ा हो जावोगे।यह सुनकर राजा को बड़ा दु:ख हुआ, उसने अपने पुत्र से कह दिया कि तुम मुझे कीड़ा बनने के बाद तुरन्त मार देना। समय आने पर वह राजा कीड़ा बन गया। परन्तु जबभी पुत्र उस कीड़े को मारने जाता, वह अपनी जान बचाकर विष्ठा के अन्दर ही घुस जाता । पुत्र द्वारा मुनिराज से इसका कारण पूछे जाने पर मुनि ने कहा कि हे भव्यात्मन् ! यह जीव जहां चला जाता है वहीं रम जाता है और वहां से निकलना नहीं चाहता है । केवल नरकगति ऐसी है जहां से प्रतिक्षण निकलना चाहता है किन्तु आयु पूरी किए बिना वहाँ से निकल नहीं सकता है।