ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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02.काल परिवर्तन

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काल परिवर्तन

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प्रश्न- काल कितने होते हैं तथा कौन-कौन से होते हैं?

उत्तर- काल दो प्रकार के होते हैं- १. उत्सर्पिणी २. अवसर्पिणी।

प्रश्न- अवसर्पिणी काल कितने वर्ष का होता है?

उत्तर- अद्धापल्यों से निर्मित दस कोड़ा कोड़ी सागर प्रमाण अवसर्पिणी काल होता है।

प्रश्न- उत्सर्पिणी काल कितने वर्ष का होता है?

उत्तर- अवसर्पिणी काल के समान ही उत्सर्पिणी काल भी दस कोड़ा-कोड़ी सागर प्रमाण होता है।

प्रश्न- उत्सर्पिणी व अवसर्पिणी काल में अंतर बताइये?

उत्तर- अवसर्पिणी काल में शरीर की ऊँचाई, आयु, वैभव आदि घटते रहते हैं और उत्सर्पिणी काल में शरीर की ऊँचाई, आयु आदि बढ़ते रहते हैं।

प्रश्न- षट्काल कितने-कितने वर्षों के होते हैं?

उत्तर- प्रथम सुषमा-सुषमा काल चार कोड़ाकोड़ी सागर, द्वितीय सुषमा काल तीन कोड़ा-कोड़ी सागर, तृतीय काल दो कोड़ा-कोड़ी सागर, चतुर्थ काल बयालीस हजार वर्ष कम एक कोड़ाकोड़ी सागर, पंचम काल इक्कीस हजार वर्ष प्रमाण और छठा काल भी इक्कीस वर्ष प्रमाण है।

प्रश्न- दश प्रकार के कल्पवृक्षों के नाम बताओ?

उत्तर- पानांग, तूर्यांग, भूषणांग,वस्त्रांग, भोजनांग, आलयांग, दीपांग, भाजनांग, मालांग और ज्योतिरंग ये दश प्रकार के कल्पवृक्ष होते हैं।

प्रश्न- हुण्डावसर्पिणी काल किसे कहते हैं?

उत्तर- हुण्डावसर्पिणी काल—इस काल में तृतीय काल में कुल काल शेष रहने पर वर्षा, विकलेन्द्रिय जीवोत्पत्ति, कल्पवृक्षों का अंत, कर्मभूमि व्यापार प्रारंभ, चक्रवर्ती का विजयभंग, ब्राह्मणवणोत्पत्ति, अनेक निकृष्ट जातियाँ आदि नाना प्रकार के दोष होते हैं।

प्रश्न- हुण्डावसर्पिणी काल कब आता है?

उत्तर- असंख्यात अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल की शलाकाओं के बीत जाने पर हुण्डावसर्पिणी काल आता है।

प्रश्न- भूमि के कितने भेद हैं?

उत्तर- भूमियाँ दो प्रकार की होती हैं-१. भोगभूमि २. कर्मभूमि।

प्रश्न- कर्मभूमि के कितने भेद है वे कहाँ-कहाँ हैं?

उत्तर- १७० कर्मभूमियाँ होती हैं। एक-एक जम्बूद्वीप के विदेह में ४-४ वक्षार पर्वत और ३-३ विभंगा नदियाँ होने से १-१ विदेह के ८-८ भाग हो गये है। इन चार विदेहों के बत्तीस भाग-विदेह हो गये हैं। ये ३२ विदेह एक मेरु सम्बंधी है। तो ढ़ाई द्वीप के ५ मेरु सम्बन्धी ३२²५·१६० और ५ भरत एवं ५ ऐरावत के इस प्रकार ये ही १७० कर्मभूमियाँ हैं।

प्रश्न- उत्सर्पिणी-अवसर्पिणी में वर्तमान में कौन सा काल चल रहा है?

उत्तर- उत्सर्पिणी-अवसर्पिणी में वर्तमान में अवसर्पिणी काल चल रहा है।

प्रश्न- कल्पवृक्ष कौन-कौन से काल में रहते हैं?

उत्तर- अवसर्पिणी काल में कल्वृक्ष प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय काल में रहते हैं। उत्सर्पिणी काल में चतुर्थ, पंचम और षष्ठम काल में कल्पवृक्ष रहते हैं।

प्रश्न- कोड़ा-कोड़ी सागर वर्ष का क्या तात्पर्य है?

उत्तर- एक करोड़ को एक करोड़ से गुणा करने पर कोड़ा-कोड़ी बनता है।

प्रश्न- प्रथम काल में मनुष्यों की आयु तथा ऊँचाई बतावें?

उत्तर- प्रथम काल में मनुष्यों की आयु तीन पल्य प्रमाण और शरीर की ऊँचाई छह हजार धनुष होती है।

प्रश्न- भोगभूमि के मनुष्य मरकर कौन-कौन सी गतियों में जा सकते हैं?

उत्तर- भोगभूमिज मनुष्य यदि मिथ्यादृष्टि हैं तो भवनत्रिक में जन्म लेते हैं और यदि सम्यग्दृष्टि हैं तो सौधर्म युगल में जन्म लेते हैं।

प्रश्न- भोगभूमिया जीवों का जन्म और मृत्यु कैसे होती है?

उत्तर- भोगभूमि मनुष्य और तिर्यंच माता पिता की नव मास आयुशेष रहने पर युगलिया जन्म लेते हैं और संतान के जन्मते ही पुरुष को छींक और स्त्री को जंभाई आते ही मृत्यु को प्राप्त होते ही विलीन हो जाते हैं।

प्रश्न- भोगभूमिया मनुष्य कितनी आयु में युवा हो जाते हैं?

उत्तर- भोगभूमिया मनुष्य इक्कीस दिन में युवा हो जाते हैं।

प्रश्न- भोगभूमि में सम्यक्त्व की उत्पत्ति के कौन-कौन से निमित्त कारण होते हैं?

उत्तर- भोगभूमि में कोई जीव जतिस्मरण से, कोई देवों के सम्बोधन करने से और कोई ऋद्धिधारी मुनि आदि के उपदेश सुनने से-इस प्रकार तीन कारण से सम्यक्त्व ग्रहण कर सकते हैं।

प्रश्न- भोगभूमिया मनुष्यों को सम्यग्दर्शन की योग्यता कितनी आयु में प्राप्त होती है?

उत्तर- भोगभूमिया मनुष्यों को सम्यग्दर्शन की योग्यता इक्कीस दिन में प्राप्त होती है।

प्रश्न- इस अवसर्पिणी काल में मोक्ष का द्वार किनने खोला?

उत्तर- इस अवसर्पिणी काल में मोक्ष का द्वार भगवान ऋषभदेव ने खोला।

प्रश्न- दो प्रकार की कर्मभूमियाँ कौन-कौन सी होती हैं?

उत्तर- कर्मभूमि शाश्वत व अशाश्वत इस प्रकार दो प्रकार की हैं।

प्रश्न- मनुष्यों के दो भेद कौन से हैं?

उत्तर- मनुष्यों के दो भेद आर्य और म्लेच्छ हैं।

प्रश्न- आर्य कितने प्रकार के माने गये हैं?

उत्तर- आर्य पाँच प्रकार के माने गये हैं-दर्शन, चारित्र, क्षेत्र, जाति और क्रिया से।

प्रश्न- म्लेच्छ खण्डों में कौन सा काल है?

उत्तर- म्लेच्छ खण्डों में वर्तमान में चतुर्थ काल चल रहा है।

प्रश्न- भोगभूमियाँ मनुष्यों का जन्म कैसे होता है?

उत्तर- भोगभूमिया मनुष्यों का जन्म गर्भज होता है।

प्रश्न- भोगभूमि कौन-कौन से काल में रहती है?

उत्तर- भोगभूमि प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ काल में रहती है, चतुर्थ काल के अन्त में समाप्त हो जाती है।

प्रश्न- भोगभूमि में जन्म-मरण की क्या प्रक्रिया थी?

उत्तर- भोगभूमि में जन्म माता के गर्भ से युगलिया के रूप में होते ही तत्क्षण पुरुष की डींक एवं स्त्री को जंभाई आते ही मृत्यु हो जाती थी।

प्रश्न- पंचम काल का अंत तथा छठे काल का आरम्भ कैसे होगा?

उत्तर- पंचम काल के अंत में लोग अविनीत, असूयक, सात भय व आठ मदों से युक्त, कलहप्रिय, व्रूर आदि प्रकृतियों से युक्त होंगे। २१ कल्की होंगे, अन्तिम कल्की द्वारा मुनिराज से आहार का प्रथम ग्रास कर के रूप में मांगने पर वह सन्यास को धारण कर लेंगे धर्म, अग्नि नष्ट हो जायेंगे तदनन्तर तीन वर्ष, आठ माह और एक पक्ष के बीत जाने पर छठे काल का आरंभ होगा जिसमें मनुष्य अनेक प्रकार की विकृतियों से युक्त होंगे।

प्रश्न- पंचमकाल के अंत में होने वाले मुनि, आर्यिका, श्रावक, श्राविका का नाम बताओ?

उत्तर- पंचमकाल के अंत में होने वाले मुनि ‘वीरांगज’, ‘सर्वश्री’ आर्यिका व अग्निदत्त और पंगुश्री नामक श्रावक-श्राविका होंगे।

प्रश्न- वीरांगन मुनि तथा शेष तीनों मरकर कहाँ जायेंगे?

उत्तर- वीरांगज मुनि एक सागर आयु से युक्त होते हुए सौधर्म स्वर्ग में तथा शेष तीनों जीव भी एकपल्य से कुछ अधिक आयु को लेकर ही उत्पन्न होंगे।

प्रश्न- प्रलयकाल कौन से काल में आवेगा?

उत्तर- छठे काल में उनचास दिन कम इक्कीस हजार वर्ष के बीत जाने पर जीवों का भयदायक घोर प्रलयकाल आएगा।

प्रश्न- छठा काल आने में अभी कितना समय है?

उत्तर- छठा काल आने में अभी साढ़े अठारह हजार वर्ष वाकी है।

प्रश्न- छठे काल के अंत में कितने दिन तक कौन सी निकृष्ट वस्तुओं की वर्षा होती है?

उत्तर- छठे काल के अंत में मेघों के समूह सात प्रकार की निकृष्ट वस्तुओेंं की सात-सात दिन तक वर्षा करते हैं जिनके नाम-१. अत्यन्त शीतल जल २. क्षार जल ३.विष ४. धुआँ ५. धूलि ६. वङ्का एवं ७. जलती हुई दुष्प्रेक्ष्य अग्नि ज्वाला।

प्रश्न-कुलकर कितने होते हैं? प्रथम व अन्तिम कुलकर का नाम बताओ?

उत्तर- कुलकर चौदह होते हैं। प्रथम कुलकर का नाम प्रतिश्रुति एवं अंतिम कुलकर का नाम नाभिराय है।