ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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03.प्रकृति ने मनुष्य की शरीर रचना शाकाहारी जीवों जैसी ही बनाई

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प्रकृति ने मनुष्य की शरीर रचना शाकाहारी जीवों जैसी ही बनाई

इस सृष्टि में शाकाहारी व मांसाहारी जीवों की अनेक जातियां हैं और बहुत छोटे से लेकर बहुत बड़े आकार तक के विभिन्न प्रकार के जीव हैं, किन्तु सभी शाकाहारी जीवों की शरीर रचना, हाथ, पांव, दांत, आंतों आदि की बनावट व उनकी देखने सूंघने की शक्ति व खाने पीने का ढंग मांसाहारी जीवों से भिन्न है । जैसे-

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1.मांसाहारी जीवों के दांत नुकीले व पंजे तेज नाखून वाले होते हैं जिससे यह आसानी से अपने शिकार को चीर फाड़ कर खा सकें ।

शाकाहारी जीवों के दांत चपटी दाढ़ वाले होते हैं, पंजे तेज नाखून वाले नहीं होते जो चीर फाड़ कर सकें अपितु फल आदि आसानी से तोड़ सकने वाले होते हैं ।

2.मांसाहारी जीवों के निचले जबड़े केवल ऊपर नीचे ही हिलते हैं और वे अपना भोजन बगैर चबाए ही निगलते हैं ।

शाकाहारी जीवों के निचले जबड़े ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं सब ओर हिल सकते हैं और ये अपना भोजन चबाने के बाद निगलते हैं ।

3.मांसाहारी प्राणियों की जीभ खुरदरी होती है, ये जीभ बाहर निकाल कर उससे पानी पीते हैं ।

शाकाहारियों की जीभ चिकनी होती है, ये पानी पीने के लिए जीभ बाहर नहीं निकालते अपितु होठों से पीते हैं ।

4.मांसाहारी जीवों की आंतों की लम्बाई कम, करीब करीब उनके शरीर की लम्बाई के बराबर और धड़ की लम्बाई से 6 गुनी होती है । आंते छोटी होने के कारण वे मांस के सड़ने व विषाक्त होने से पहले ही उसे शरीर से बाहर फेंक देती हैं ।

शाकाहारी जीवों की आंतों की लम्बाई अधिक, करीब करीब इनके शरीर की लम्बाई से चार गुनी व धड़ की लम्बाई से 12 गुनी होती है, इस कारण वे मांस को जल्दी बाहर नहीं फेंक पातीं ।

5.मांसाहारी जीवों के जिगर (Lever) व गुर्दे (Kidney) भी अनुपात में बड़े होते हैं ताकि मांस का व्यर्थ मादा आसानी से बाहर निकल सके ।

शाकाहारी जीवों के जिगर (Lever) व गुर्दे (Kidney) में छोटे होते हैं और मांस के व्यर्थ मादे को आसानी से बाहर नहीं निकाल पाते।

6.मांसाहारी जीवों के पाचक अंगों में मनुष्य के पाचक अंगों की अपेक्षा दस गुना अधिक हाइड़ोक्लोरिक एसिड होता है जो मांस को आसानी से पचा देता है।

शाकाहारी जीवों के पाचक अंगों में हाइड्रोक्लोरिक एसिड कम होता है व मांस को आसानी से नहीं पचा पाता।

7.मांसाहारी जीवों की (Saliva) लार अप्लीय (Acidic) होती है।

शाकाहारी जीवों की लार क्षारीय (Alkaline) होती है व उनकी लार में (Ptyaline) टायलिन रसायन जो कार्बोहाइड्रेटस को पचाने में उपयोगी होता है, पाया जाता है।

8.मांसाहारी जीवों का Blood-PH (खून की एक रसायनिक स्थिति) कम होता है यानि उसका झुकाव अप्लीय (Acidic side) होता है।

शाकाहारी जीवों का Blood-PH अधिक होता है यानि उसका झुकाव क्षारीय ओर (AIKaline side) को होता है।

9.मांसाहारी जीवों के Blood Lipo-Protiens अलग किस्म के होते हैं।

शाकाहारी पशुओं व मनुष्य के Blood Lipo-Protiens एक से होते हैं व मांसाहारी जीवों से भिन्न होते हैं।

10.मांसाहारी जीवों की सूंघने की शक्ति अत्यन्त तीव्र होती है, आँखें रात्रि में चमकती हैं व रात मे भी दिन की प्रकार देख पाती हैं। ये शक्तियां उसे शिकार करने में सहायक होती हैं।

शाकाहारी जीवों में सूंघने की शक्ति उतनी तीव्र नहीं होती व रात में भी दिन की भांति देखने की शक्ति नहीं होती।

11.मांसाहारी जीवों के शब्द कर्कश व भयंकर होते हैं।

शाकाहारी जीवों के शब्द कर्कश नहीं होते।

12.मांसाहारी जीवों के बच्चे जन्म के बाद एक सप्ताह तक प्राय: दृष्टि शून्य होते हैं।

शाकाहारी जीवो के बच्चे प्रारम्भ से ही दृष्टि वाले होते हैं।


उपरोक्त तथ्यों से यह पता लगता हैं -कि प्रकृति ने मनुष्य की बनावट शाकाहारी

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पशुओं गाय, घोड़ा, ऊंट, जिराफ, सांड आदि शाकाहारी पशुओं के समान ही की है, उसे शाकाहारी पदार्थो को ही सुगमता व सरलता से प्राप्त कर सकने व पचाने की क्षमता दी है । मनुष्य के अलावा संसार का कोई भी जीव प्रकृति द्वारा प्रदान की हुई शरीर रचना व स्वभाव के विपरीत आचरण करना नहीं चाहता । शेर भूखा होने पर भी शाकाहारी पदार्थ नहीं खाता और गाय भूखी होने पर भी मांसाहार नहीं करती क्योंकि वह उनका स्वाभाविक व प्रकृति अनुकूल आहार नहीं है । मांसाहारी पशु अपनी पूरी उम्र मांसाहार कर व्यतीत करते हैं उनके लिये यही पूर्ण आहार है, किन्तु कोई भी मनुष्य केवल मांसाहार पर दो तीन सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह सकता क्योंकि केवल मांस का आहार इतने अधिक तेजाब व विष (Acid and Toxins) उत्पन्न कर देगा कि उसके शरीर की संचालन क्रिया ही बिगड़ जाएगी । जो मनुष्य प्रकृति के विपरीत मांसाहार करते हैं उन्हें भी कुछ न कुछ शाकाहारी पदार्थ लेने ही पड़ते हैं क्योंकि मनुष्य के लिए मांसाहार अपूर्ण व आयु क्षीण करने वाला आहार है । (Exkimos) एसकीमों जो परिस्थिति वश प्राय : मांसाहार पर ही रहते हैं कि औसत आयु सिर्फ 3० वर्ष ही है । जबकि केवल शाकाहार पर मनुष्य पूरी व लम्बी उस सरलता से जी सकता है ।

[१]जौन्स हौपकिन्स यूनिवर्सिटी के डा. एलन वाकर ने भी दांतों के माइक्रोसकोपिक एनैलिसिस से यह पता लगाया हैं कि मनुष्य फल खाने वाले प्राणियों का वंशज है, न कि मांस खाने वालों का ।

कोई भी व्यक्ति फल, अनाज, सब्जी देख कर नफरत से नाक नहीं सिकोड़ता जबकि लटका हुआ मांस देख कर अधिकांश को घृणा होती है, क्या यह उसकी स्वाभाविक शाकाहारी प्रकृति का द्योतक नहीं है?

उपरोक्त सभी तथ्य यह प्रमाणित करते हैं कि प्रकृति ने मनुष्य की रचना शाकाहारी अदि केवल शाकाहारी भोजन के अनुकूल ही की है ।

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  1. Jane Brody's Nutrition Book, Nov. 81, published by W.W. North & Co. Inc. 5th Avenue, New York.