ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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04.लघु यागमण्डल विधानम्

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विषय सूची

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लघु यागमण्डल विधानम्

ॐ परब्रह्मणे नमो नमः स्वस्ति स्वस्ति जीव जीव नंद नंद वद्र्धस्व वद्र्धस्व विजयस्व विजयस्व अनुशाधि अनुशाधि पुनीहि पुनीहि पुण्याहं पुण्याहं मांगल्यं मांगल्यं पुष्पांजलिः (पुष्पांजलि क्षेपण करें)।

प्रभावकसिंह सानिध्य विधानाय समंतात् पुष्पाक्षतं क्षिपेत्।

त्रिभुवन साधर्मिकाध्येषणाय समंतात् पुष्पाक्षतं क्षिपेत्।
शब्दब्रह्मावर्जनाय कर्णिकामध्ये पुष्पांजलिं क्षिपेत्।
परब्रह्मयज्ञप्रतिज्ञापनाय कर्णिकान्तः पुष्पांजलिं क्षिपेत्।

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कर्णिका में अर्हंत पूजा

ॐ ह्रीं अर्हं श्रीं परब्रह्मन् अर्हत्परमेष्ठिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं अर्हं श्रीं परब्रह्मन् अर्हत्परमेष्ठिन्! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं अर्हं श्रीं परब्रह्मन् अर्हत्परमेष्ठिन्! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं अर्हं श्रीं अर्हत्परमेष्ठिने अनन्तानन्तज्ञानशक्तये जलं निर्वपामीति स्वाहा। (ऐसे ही चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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सिद्ध पूजा

ॐ ह्रीं श्री सिद्धपरमेष्ठिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं श्री सिद्धपरमेष्ठिन्! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं श्री सिद्धपरमेष्ठिन्! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं श्री सिद्धपरमेष्ठिने जलं निर्वपामीति स्वाहा। (ऐसे ही चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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आचार्य पूजा

ॐ ह्रीं श्रीमदाचार्यपरमेष्ठिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं श्रीमदाचार्यपरमेष्ठिन्! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं श्रीमदाचार्यपरमेष्ठिन्! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं श्रीमदाचार्यपरमेष्ठिने जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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उपाध्याय पूजा

ॐ ह्रीं श्री उपाध्यायपरमेष्ठिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं श्री उपाध्यायपरमेष्ठिन्! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं श्री उपाध्यायपरमेष्ठिन्! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं श्री उपाध्यायपरमेष्ठिने जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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साधु पूजा

ॐ ह्रीं श्री सर्वसाधुपरमेष्ठिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं श्री सर्वसाधुपरमेष्ठिन्! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं श्री सर्वसाधुपरमेष्ठिन्! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं श्री सर्वसाधुपरमेष्ठिने जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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तीन चैबीसी अर्घ्य

ॐ ह्रीं निर्वाणसागराद्यतीतकालतीर्थंकरेभ्यः अघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।


ॐ ह्रीं वृषभाजितादिवर्तमानार्हत्परमेष्ठिभ्यः अघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।

ॐ ह्रीं महापद्मसुरदेवादिअनागतकालतीर्थंकरेभ्यः अघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।

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अर्हंतमंगलादि चार अर्घ्य

ॐ ह्रीं र्हं श्रीं अर्हन्मंगललोकोत्तमशरणेभ्यो अघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।


ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सिद्धमंगललोकोत्तमशरणेभ्यो अघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।

ॐ ह्रीं र्हं श्रीं साधुमंगललोकोत्तमशरणेभ्यो अघ्र्यं निर्वपामीति स्वाहा।

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जिनधर्म पूजा

ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मकधर्म! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मकधर्म! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं र्हं श्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मकधर्म! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्रात्मकधर्माय जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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जिनागम पूजा

ॐ ह्रीं श्री जिनागम! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं श्री जिनागम! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं श्री जिनागम! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं श्री जिनागमाय जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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जिनचैत्य पूजा

ॐ ह्रीं र्हं श्रीं जगत्त्रयवर्तिजिनबिम्बसमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं र्हं श्रीं जगत्त्रयवर्तिजिनबिम्बसमूह!अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं र्हं श्रीं जगत्त्रयवर्तिजिनबिम्बसमूह!अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं जगत्त्रयवर्तिजिनबिम्बसमूहाय जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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जिनचैत्यालय पूजा

ॐ ह्रीं र्हं श्री जगत्त्रयवर्तिजिनचैत्यालयसमूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट्।


ॐ ह्रीं र्हं श्री जगत्त्रयवर्तिजिनचैत्यालयसमूह! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठः ठः।

ॐ ह्रीं र्हं श्री जगत्त्रयवर्तिजिनचैत्यालयसमूह! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट्।

ॐ ह्रीं जगत्त्रयवर्तिजिनचैत्यालयसमूहाय जलं निर्वपामीति स्वाहा। (इसी मंत्र से चंदन आदि आठों द्रव्य चढ़ाएँ।)

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अनादिसिद्ध मंत्र

ॐ णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लोए सव्वसाहूणं। चत्तारि मंगलं-अरिहंत मंगलं। सिद्ध मंगलं। साहु मंगलं। केवलिपण्णत्तो धम्मो मंगलं। चत्तारि लोगुत्तमा-अरिहंत लोगुत्तमा। अरिहंत लोगुत्तमा। सिद्ध लोगुत्तमा। साहु लोगुत्तमा। केवलिपण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमा। चत्तारि सरणं पव्वज्जामि-अरिहंत सरणं पव्वज्जामि। सिद्ध सरणं पव्वज्जामि। साहु सरणं पव्वज्जामि। केवलिपण्णत्तो धम्मो सरणं पव्वज्जामि। ह्रौं शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा। (इस अनादि सिद्धमंत्र से 21 बार पुष्पों से जप करें।)

ॐ ह्रीं जयादि अष्टदेवीभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।


ॐ ह्रीं रोहिण्यादि षोडशविद्यादेवताभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं मरूदेव्यादि जिनमातृभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं सौधर्मेन्द्रादिद्वात्रिंशत् इन्द्रेभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं यक्षवैश्वानर आदि पंचदशतिथि देवताभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं सूर्यादिनवग्रहदेवेभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं गोमुखादि चतुर्विंशतियक्षेभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं चक्रेश्वर्यादिचतुर्विंशतियक्षीभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं श्री ह्रीं धृति आदि अष्टादिक्कन्यकाभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं इन्द्रादिदशदिक्पालकेभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं सोमयमवरुणकुबेरनाम चतुद्र्वारपालकेभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं विजयवैजयंत जयंतापराजितनामचतुर्दिग्द्वाररक्षकेभ्यः इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं दशदिशाधिनाथ जम्बूद्वीपाधिपति अनावृतयक्षाय इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं लौकांतिकदेवेभ्यः पुष्पांजलिं। इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

ॐ ह्रीं अहमिन्द्रदेवेभ्यः पुष्पांजलिं। इदं अघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां इति स्वाहा।

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मंगलाष्टक स्थापना

(एक-एक मंत्र बोलकर वेदी में एक-एक मंगलद्रव्य स्थापित करें) 1. ॐ श्वेतच्छत्राश्रियै स्वाहा।

2. ॐ अब्दश्रियै स्वाहा।

3. ॐ ध्वजाश्रियै स्वाहा।

4. ॐ चामरश्रियै स्वाहा।

5. ॐ तोरणाश्रियै स्वाहा।

6. ॐ तालवृंतश्रियै स्वाहा।

7. ॐ नंद्यावर्तश्रियै स्वाहा।

8. ॐ दीपश्रियै स्वाहा।

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अष्ट आयुध स्थापना

1. ॐ इन्द्राण्यै स्वाहा। (पूर्व में वज्र)

2. ॐ वैष्णव्यै स्वाहा। (दक्षिण में चक्र)

3. ॐ कौमायै स्वाहा। (पश्चिम में तलवार)

4. ॐ वाराहिकायै स्वाहा। (उत्तर में हल)

5. ॐ ब्रह्माण्यै स्वाहा। (आग्नेय में मुद्गर)

6. ॐ लक्ष्म्यै स्वाहा। (नैऋत्य में गदा)

7. ॐ चामुण्ड्यै स्वाहा। (वायव्य में दण्ड)

8. ॐ रुद्राण्यै स्वाहा। (ईशान में भिण्डिमाल)

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आठ पताका स्थापना

1. ॐ प्रभावत्यै स्वाहा। (पूर्व में पीली ध्वजा)

2. ॐ पद्मायै स्वाहा। (आग्नेय में लाल ध्वजा)

3. ॐ मेघमालिन्यै स्वाहा। (दक्षिण में काली ध्वजा)

4. ॐ मनोहरायै स्वाहा। (नैऋत में हरी ध्वजा)

5. ॐ चन्द्रमालायै स्वाहा। (पश्चिम में श्वेत ध्वजा)

6. ॐ सुप्रभायै स्वाहा। (वायव्य में नीली ध्वजा)

7. ॐ जयायै स्वाहा। (उत्तर में काली ध्वजा)

8. ॐ विजयायै स्वाहा। (ईशान में पंचवर्णी ध्वजा)

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अष्टकलश स्थापना

ॐ इति कलशाष्टकस्थापनं करोमि स्वाहा।

वाणचतुष्टय स्थापना
आग्नेयादिविदिक्षु वाणान् स्थापयामि स्वाहा। (चारों कोनों पर वाण स्थापित करें)
ॐ सिद्धार्थपुंज स्थापनं करोमि स्वाहा। (चारों कोनों पर सरसों के पुंज स्थापित करें)
ॐ यवारक स्थापनं करोमि स्वाहा। (मंडल के ऊपर धान्यांकुरों के कुंडे स्थापित करें)
शिला स्थापना
ॐ सर्वजनानंदकारिणि सौभाग्यवति! तिष्ठ तिष्ठ स्वाहा। (मंडल पर शिला-लोढा सहित रखें।)
पूर्णाघ्र्य
ॐ ह्रीं यंत्रस्थापितसर्वदेवताभ्यः पूर्णाघ्र्यं यजामहे प्रतिगृह्यतां प्रतिगृह्यतां यजमानप्रभृतीनां शांतिं कुरुत कुरुत स्वाहा।
अनादिसिद्ध मंत्र
ॐ णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लोए सव्वसाहूणं। चत्तारि मंगलं-अरिहंत मंगलं। सिद्ध मंगलं। साहु मंगलं। केवलिपण्णत्तो धम्मो मंगलं। चत्तारि लोगुत्तमा-अरिहंत लोगुत्तमा। सिद्ध लोगुत्तमा। साहु लोगुत्तमा। केवलिपण्णत्तो धम्मो लोगुत्तमा। चत्तारि सरणं पव्वज्जामि-अरिहंत सरणं पव्वज्जामि। सिद्ध सरणं पव्वज्जामि। साहु सरणं पव्वज्जामि। केवलिपण्णत्तो धम्मो सरणं पव्वज्जामि। ह्रौं शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
।। इति लघुयागमण्डल विधानम्।।