ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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04.व्रत समापन विधि

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व्रत समापन विधि

ॐ आद्यानाम् आद्ये जम्बूद्वीपे भरतक्षेत्रे शुभे .....मासे ..... पक्षे अद्य ..... तिथौ श्रीमदर्हत्प्रतिमासन्निधौ पूर्वं यद्व्रतं गृहीतं तस्य परिसमाप्तिं करिष्ये-अहम्। प्रमादाज्ञानवशात् व्रते जायमानदोषा: शांतिमुपयान्ति-ॐ ह्रीं क्ष्वीं स्वाहा। श्रीमज्जिनेन्द्रचरणेषु आनंदभक्ति: सदास्तु, समाधिमरणं भवतु, पापविनाशनं भवतु-ॐ ह्रीं असि आ उ सा नम:। सर्वशांतिर्भवतु स्वाहा।