ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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प्रथामाचार्य श्री शांतिसागर महाराज की 62 वीं पुण्यतिथि (भाद्रपद शुक्ला दुतिया) 23 अगस्त को मुंबई के जैनम हाल में पूज्य गणिनी ज्ञानमती माता जी के सानिध्य में मनायी जाएगी जैन धर्मावलंबी अपने-अपने नगरों में विशेष रूप से इस पुण्यतिथि को मनाकर सातिशय पुण्य का बंध करें|
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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 22 और 23 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं साधुसमाधि भावनायै नमः"

07.जिनवाणी स्तुति

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जिनवाणी स्तुति

हे सरस्वती माता, अज्ञान दूर कर दो।

जग को देकर साता, विज्ञान पूर भर दो।। टेक.।।
श्रुत का भण्डार भरा, तेरे ज्ञान की गंगा में।
जन मन शृंगार करा, गुरुवर मुनि चन्दा ने।।
शृंगार सहित माता, श्रुतज्ञान पूर्ण कर दो।
जग को देकर साता, विज्ञान पूर भर दो।।१।।

प्रभु वीर की वाणी सुन, गणधर ने संवारा है।
मुनिगण उस पथ पर चल, निज ज्ञान सुधारा है।।
निज ज्ञान किरणदाता, आलोक ज्ञान भर दो।
जग को देकर साता, विज्ञान पूर भर दो।।२।।

चंदन चंदा गंगा, तन शीतल कर सकते।
मुक्ता मालाएँ भी, निंह मन को हर सकते।।
‘चंदनामती’ सबको, शारद माँ का वर दो।
जग को देकर साता, विज्ञान पूर भर दो।।३।।