ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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07. सातवाँ भव

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विषय सूची

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(सातवाँ भव)

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प्रश्न १ -अहमिन्द्र की आयु कितने सागर की थी?

उत्तर -२७ सागर।

प्रश्न २ -अहमिन्द्र का शरीर कैसा था?

उत्तर -अहमिन्द्र का शरीर अतिशय देदीप्यमान, समचतुरस्र संस्थान से युक्त था।

प्रश्न ३ -अहमिन्द्र कहाँ-कहाँ जाते हैं?

उत्तर -अहमिन्द्र परक्षेत्र में विहार नहीं करते हैं।

[सम्पादन] प्रश्न ४ -स्वर्ग में रहते हुए वे क्या करते हैं?

उत्तर -अहमिन्द्र तत्त्वचर्चा में तल्लीन रहते हुए सम्यग्दर्शन की प्रशंसा करते हैं और अपनी आत्मा के अधीन उत्पन्न हुए उत्कृष्ट सुख को धारण करते हुए सदैव प्रसन्न रहते हैं।

प्रश्न ५ -अहमिन्द्र का जीव स्वर्ग से च्युत होकर कहाँ जन्मा?

उत्तर -अहमिन्द्र का जीव स्वर्ग से च्युत होकर अयोध्या में आनन्द नामक राजकुमार के रूप में जन्मा।

प्रश्न ६ -कमठ का जीव भील मरकर कहाँ गया?

उत्तर -भील रौद्रध्यानपूर्वक शरीर को छोड़कर मुनिहत्या के पाप से सातवें नरक में चला गया।

प्रश्न ७ -जन्मते ही उसे किस दुख का सामना करना पड़ा?

उत्तर -उस अंधकूपमय नरकवास में उसने औंधे मुख जन्म लिया और जन्म लेते ही भूमि पर धड़ाम से गिरा, भूमि का स्पर्श होते ही जैसे हजारों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मारा हो, ऐसी भयंकर वेदना हुई, पुन: वह नारकी ५० योजन तक ऊपर उछला और गिरा, जैसे तपे हुए तवे पर तिलों को डालते ही वे पुटपुट उछलने लगते हैं। छिन्न-भिन्न शरीर होता हुआ अत्यन्त दुखी और भयभीत उसी धरा पर लोट-पोटकर बिलबिलाने लगा।

[सम्पादन] प्रश्न ८ -नारकी जीव के कितने और कौन से ज्ञान होते हैं?

उत्तर -नारकी जीव के कुमति, कुश्रुत और कुअवधि ये तीन ज्ञान होते हैं।

प्रश्न ९ -वहाँ भूख लगने पर क्या आहार है?

उत्तर -नारकी जीव यदि तीन लोक का अन्न भी खा जायें तो भी उनकी भूख शांत नहीं हो सकती है किन्तु खाने को वहाँ एक कण भी नसीब नहीं होता है।

प्रश्न १०-प्यास लगने पर पीने योग्य वस्तु क्या है?

उत्तर -सागर के समस्त जल को पीने के बाद भी प्यास बुझ नहीं सकती, फिर भी वहाँ पर एक बूँद पानी नहीं मिलता है।

प्रश्न ११-क्या नरक में हर समय ठण्डक रहती है?

उत्तर -नरक में इतनी भयंकर ठण्डी है कि एक लाख योजन प्रमाण इतने बड़े लोहे के गोले को पिघलाकर डाल दो किन्तु उसी क्षण वह जम जाता है।

[सम्पादन] प्रश्न १२-उस नारकी को कितने वर्ष तक यह दु:ख भोगने पड़े?

उत्तर -भील का जीव वहाँ पर सत्ताईस सागर प्रमाण मध्यम आयु पर्यंत इन दु:खों का अनुभव करता रहा है।

प्रश्न १३-सागर किसे कहते हैं?

उत्तर -दो हजार कोश प्रमाण एक लम्बा-चौड़ा और गहरा गड्ढा कल्पना में बनाइये। उसे सात दिन के अन्दर जन्में हुए भेड़ों के बालों से भर दीजिए। इन बालों के इतने-इतने छोटे खण्ड कर दिए जाएं जिनका फिर और खण्ड ही न हो सके, ऐसे रोम खण्डों से भरे हुए उस गड्ढे की खूब ऊपर से कुटाई कर दीजिए। पुन: उनमें से एक-एक रोम को सौ-सौ बरस में निकालिए। जब वह गर्त खाली हो जाए तब एक ‘व्यवहार पल्य’ होता है। इसमें जितना समय लगा है उसे असंख्यात करोड़ वर्षों के समयों से गुणा कर दीजिए। इसमें जितने समय जावेंगे वह ‘उद्धार पल्य’ कहलाता है। अनन्तर सौ वर्ष के जितने समय हैं उतने समयों से उद्धार पल्य के रोमों को गुणित करने से जितने समय होवें यह ‘अद्धापल्य’ हो जाता है। इन दस कोड़ाकोड़ी ‘अद्धापल्यों’ का एक सागर होता है।

प्रश्न १४-कोड़ाकोड़ी किसे कहते हैं?

उत्तर -एक करोड़ को एक करोड़ से गुणा करने पर जो संख्या आती है वह कोड़ाकोड़ी कहलाती है।