ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्याग भावनायै नमः"

08.नवग्रह शांतिकारक नव बृहद् मंत्र

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नवग्रह शांतिकारक नव बृहद् मंत्र

१. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते पद्मप्रभतीर्थंकराय कुसुमयक्ष-मनोवेगायक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: आदित्यमहाग्रह! मम (..........१) सर्वदुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं कुरु कुरु सर्वशांतिं कुरु कुरु सर्वसमृद्धिं कुरु कुरु इष्टसंपदां कुरु कुरु अनिष्टनिवारणं कुरु कुरु धनधान्यसमृद्धिं कुरु कुरु काममांगल्योत्सवं कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (७००० जाप्य) अथवा-

१. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते पद्मप्रभतीर्थंकराय कुसुमयक्ष-मनोवेगायक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: आदित्यमहाग्रह मम (.........) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (७००० मंत्र)

२. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते चन्द्रप्रभतीर्थंकराय विजययक्ष-ज्वालामालिनीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: सोममहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (११००० मंत्र)

३. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते वासुपूज्यतीर्थंकराय षण्मुखयक्ष-गांधारीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: कुजमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (१०००० मंत्र)

४. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते मल्लिनाथतीर्थंकराय कुबेरयक्ष-अपराजितायक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: बुधमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (१४००० मंत्र)

५. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते वर्धमानतीर्थंकराय मातंगयक्ष-सिद्धायिनीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: गुरुमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (१९००० मंत्र)

६. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते पुष्पदंतनाथतीर्थंकराय अजितयक्ष-महाकालीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: शुक्रमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (१६००० मंत्र)

७. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते मुनिसुव्रतनाथतीर्थंकराय वरुणयक्ष-बहुरूपिणीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: शनिमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (२३००० मंत्र)

८. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते नेमिनाथतीर्थंकराय सर्वाण्हयक्ष-कूष्माण्डीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: राहुमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (१८००० मंत्र)

९. ॐ नमोऽर्हते भगवते श्रीमते पार्श्र्वनाथतीर्थंकराय धरणेन्द्रयक्ष-पद्मावतीयक्षीसहिताय ॐ आं क्रौं ह्रीं ह्र: केतुमहाग्रह! मम (......) दुष्टग्रहरोगकष्टनिवारणं सर्वशांतिं च कुरु कुरु हूँ फट् स्वाहा। (७००० मंत्र)