ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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08. अपूर्वकरण गुणस्थान

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८. अपूर्वकरण गुणस्थान

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अध:प्रवृत्तकरण में अंतर्मुहूर्त रहकर ये मुनि प्रतिसमय अनंतगुणी विशुद्धि को प्राप्त होते हुए एवं पूर्व में कभी भी नहीं प्राप्त हुए ऐसे अपूर्वकरण जाति के परिणामों को प्राप्त होते हैं । यहाँ पर एक समयवर्ती मुनियों के परिणामों में सदृशता और विसदृशता दोनों ही होती है । इसका काल भी अंतर्मुहूर्त है ।