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09.यतिभावना प्रश्नोत्तरी

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यतिभावना

प्रश्न १९८—मुनिगण किन प्रकार की भावनाओं का चिन्तवन करते हैं ?
उत्तर—चित्त की वृत्तियों को रोककर तथा इन्द्रियों को उजाड़कर, श्वासोच्छ्वास को रोककर, धीरता को धारण कर, पर्यंकासन से आनन्द स्वरूप चैतन्य की तरफ दृष्टि लगाकर ‘‘निर्जन पर्वत की गुफा में बैठकर मैं कब आत्मध्यान करूंगा‘‘ मुनिगण ऐसा चिन्तन करते हैं।

प्रश्न १९९—योगीश्वर ग्रीष्म ऋतु में कहाँ पर ध्यान करते हैं ?
उत्तर—योगीश्वर ग्रीष्म ऋतु में पहाड़ों के अग्रभाग में स्थित शिला के ऊपर ध्यान रस में लीन होकर रहते हैं।

प्रश्न २००—योगीजन वर्षाकाल में कहाँ ध्यान करते हैं ?
उत्तर—वे वर्षाकाल में वृक्षों के मूल में बैठकर ध्यान करते हैं।

प्रश्न २०१—शरदऋतु में मुनिराज कहाँ ध्यान लगाते हैं ?
उत्तर—शरदऋतु में चौड़े मैदान में बैठकर ध्यान लगाते हैं।

प्रश्न २०२—मुनिराज किस प्रकार का समाधियुक्त ध्यान लगाते हैं ?

उत्तर—शाम्य भाव के धारक मुनियों के समाधियुक्त ध्यान होने पर मस्तक पर वङ्का गिरने पर भी तथा तीनों लोक के जलने पर भी और निज प्राणों के नष्ट होने पर भी मन को किसी प्रकार का विकार नहीं होता।