ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर २०१६- रविवार से सीधा प्रसारण चल रहा है | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

09.यतिभावना प्रश्नोत्तरी

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
यतिभावना

-stock-photo-1.jpg
-stock-photo-1.jpg

प्रश्न १९८—मुनिगण किन प्रकार की भावनाओं का चिन्तवन करते हैं ?
उत्तर—चित्त की वृत्तियों को रोककर तथा इन्द्रियों को उजाड़कर, श्वासोच्छ्वास को रोककर, धीरता को धारण कर, पर्यंकासन से आनन्द स्वरूप चैतन्य की तरफ दृष्टि लगाकर ‘‘निर्जन पर्वत की गुफा में बैठकर मैं कब आत्मध्यान करूंगा‘‘ मुनिगण ऐसा चिन्तन करते हैं।

प्रश्न १९९—योगीश्वर ग्रीष्म ऋतु में कहाँ पर ध्यान करते हैं ?
उत्तर—योगीश्वर ग्रीष्म ऋतु में पहाड़ों के अग्रभाग में स्थित शिला के ऊपर ध्यान रस में लीन होकर रहते हैं।

प्रश्न २००—योगीजन वर्षाकाल में कहाँ ध्यान करते हैं ?
उत्तर—वे वर्षाकाल में वृक्षों के मूल में बैठकर ध्यान करते हैं।

प्रश्न २०१—शरदऋतु में मुनिराज कहाँ ध्यान लगाते हैं ?
उत्तर—शरदऋतु में चौड़े मैदान में बैठकर ध्यान लगाते हैं।

प्रश्न २०२—मुनिराज किस प्रकार का समाधियुक्त ध्यान लगाते हैं ?
उत्तर—शाम्य भाव के धारक मुनियों के समाधियुक्त ध्यान होने पर मस्तक पर वङ्का गिरने पर भी तथा तीनों लोक के जलने पर भी और निज प्राणों के नष्ट होने पर भी मन को किसी प्रकार का विकार नहीं होता।