ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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10..दशवाँ भव

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(दशवाँ भव)

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प्रश्न १ -तीर्थंकर भगवान के कितने कल्याणक होते हैं?

उत्तर -पाँच कल्याणक।

प्रश्न २ -पाँचों कल्याणकोें के नाम बताइये?

उत्तर -गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं निर्वाण ये पाँच कल्याणक हैं।

प्रश्न ३ -जैनधर्म के तेईसवें तीर्थंकर कौन हैं?

उत्तर -भगवान पार्श्वनाथ।

[सम्पादन] प्रश्न ४ -भगवान पार्श्वनाथ के माता-पिता कौन थे?

उत्तर -वाराणसी नरेश महाराजा अश्वसेन एवं महारानी वामादेवी भगवान के माता-पिता थे।

प्रश्न ५ -तीर्थंकर भगवान के गर्भ में आने के कितने माह पूर्व से रत्नवृष्टि प्रारंभ होती है?

उत्तर -छ: माह पूर्व से।

प्रश्न ६ -यह रत्नवृष्टि कहाँ होती है?

उत्तर -तीर्थंकर भगवान की माता के आँगन में।

प्रश्न ७ -रत्नवृष्टि कौन करता है और किसकी आज्ञा से करता है?

उत्तर -सौधर्म इन्द्र की आज्ञा से धनकुबेर रत्नवृष्टि करता है।

[सम्पादन] प्रश्न ८ -प्रतिदिन कितने करोड़ रत्नों की वर्षा होती है?

उत्तर -साढ़े तीन करोड़ प्रमाण रत्न प्रतिदिन बरसते हैं।

प्रश्न ९ -रत्नवृष्टि के साथ-साथ देवगण और क्या-क्या करते हैं? उत्तर -पंचाश्चर्यवृष्टि।

प्रश्न १०-माता वामादेवी ने तीर्थंकर शिशु के गर्भ में आने से पूर्व कितने स्वप्न देखे?

उत्तर -सोलह स्वप्न।

प्रश्न ११-वे सोलह स्वप्न कौन से हैं?

उत्तर -(१) ऐरावत हाथी (२) शुभ्र बैल (३) सिंह (४) लक्ष्मी देवी (५) दो फूूलमाता (६) उदित होता हुआ सूर्य (७) तारावलि से वेष्ठित पूर्ण चन्द्रमा (८) जल में तैरती हुई मछलियों का युग्म (९) कमल से ढके दो पूर्ण स्वर्ण कलश (१०) सरोवर (११) समुद्र (१२) सिंहासन (१३) देवविमान (१४) धरणेन्द्र विमान (१५) रत्नों की राशि और (१६) निर्धूम अग्नि ये सोलह स्वप्न हैं।

[सम्पादन] प्रश्न १२-महारानी ने उन स्वप्नों का फल किनसे पूछा?

उत्तर -महाराज अश्वसेन से।

प्रश्न १३-राजा ने उनका क्या फल बतलाया?

उत्तर -राजा ने कहा कि आपके गर्भ में त्रैलोक्यपति तीर्थंकर का जीव अवतरित हो चुका है, आप जगत्पति पुत्ररत्न को प्राप्त करेंगी।

प्रश्न १४-माता की सेवा के लिए कहाँ से देवियाँ आती हैं?

उत्तर -स्वर्ग से (रुचकपर्वतवासिनी एवं कुलाचलवासिनी देवियाँ)

प्रश्न १५-भगवान पार्श्वनाथ की गर्भकल्याणक तिथि क्या है?

उत्तर -वैशाख वदी व्दितीया

[सम्पादन] प्रश्न १६-भगवान पार्श्वनाथ किस तिथि में जन्मे?

उत्तर -पौषवदी ग्यारस को।

प्रश्न १७-भगवान के जन्म पर क्या विशेष बातें होती हैं?

उत्तर -उसी क्षण सहसा स्वर्ग में बिना बजाए ही घण्टे बजने लगते हैं, ज्योतिर्वासी देवों के यहाँ स्वयं ही सिंहनाद होने लगता है, भवनवासियों के भवनों में स्वयं ही शंखध्वनि उठने लगती है और व्यन्तर देवों के यहाँ भेरी बजने लगती है, इन्द्रों के आसन कांप उठते हैं, उनके मस्तक के मुकुट स्वयमेव ही झुक जाते हैं और कल्पवृक्षों से पुष्पवृष्टि होने लगती है।

प्रश्न १८-प्रभु के जन्म को जानकर सौधर्म इन्द्र क्या करता है?

उत्तर -सौधर्म इन्द्र सभी अतिशय विषयों से जिन जन्म की सूचना को पाकर आसन छोड़कर सात कदम आगे बढ़कर परोक्ष में पुन:-पुन: नमस्कार करता हुआ असीम पुण्य संचित कर लेता है अनन्तर ऐरावत हाथी पर चढ़कर शची इन्द्राणी एवं असंख्य सुरपरिवार के साथ आकर भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव मनाता है।

प्रश्न १९-जिनशिशु का प्रथम दर्शन करने का सौभाग्य किसे प्राप्त होता है?

उत्तर -शची इन्द्राणी को।

[सम्पादन] प्रश्न २०-प्रभु के प्रथम दर्शन से उसे क्या फल मिलता है?

उत्तर -शची अपनी स्त्री पर्याय को छेदकर पुन: पुरुष जन्म लेकर एक ही भव में मोक्ष चली जाती है।

प्रश्न २१-एक इन्द्र के जीवन में कितनी इन्द्राणियाँ मोक्ष चली जाती हैं?

उत्तर -चालीस नील प्रमाण शची-इन्द्राणियाँ।

प्रश्न २२-ऐसा किस कारण से होता है?

उत्तर -क्योंकि इन्द्र की आयु सागरोपम से और इन्द्राणियों की आयु पल्योपम से होती है।

प्रश्न २३-सौधर्म इन्द्र जिनशिशु का जन्माभिषेक कहाँ करते हैं?

उत्तर -सुमेरु पर्वत की पाण्डुकशिला पर।

[सम्पादन] प्रश्न २४-भगवान का ‘पार्श्वनाथ’ यह नामकरण किसने किया?

उत्तर -सौधर्म इन्द्र ने जन्माभिषेक के पश्चात् पाण्डुकशिला पर किया।

प्रश्न २५-क्या जिनशिशु माता का स्तनपान करते हैं?

उत्तर -नहीं, इन्द्र तीर्थंकर शिशु के अंगूठे में अमृत को स्थापित कर देता है, उसी अंगूठे को चूसकर जिनबालक वृद्धि को प्राप्त होते हैं।

प्रश्न २६-भगवान के साथ क्रीड़ा कौन करते हैं?

उत्तर -इन्द्र की आज्ञा से प्रभु के साथ उन्हीं की आयु के अनुरूप रूप बनाकर देवगण क्रीड़ा करते हैं।

प्रश्न २७-प्रभु के जन्म के कितने अतिशय होते हैं?

उत्तर -१० अतिशय।

[सम्पादन] प्रश्न २८-दस अतिशयों के नाम बताइये?

उत्तर -(१) अतीव सुन्दर शरीर (२) सुगंधित शरीर (३) पसीना रहित शरीर (४) मल-मूत्र रहित शरीर (५) प्रिय हित वचन (६) श्वेत रुधिर (७) अतुल्य बल (८) शरीर में १००८ लक्षण (९) समचतुरस्र संस्थान और (१०)वजवृषभनाराच संहनन।

प्रश्न २९-किन जीवों के आहार तो है किन्तु नीहार नहीं है?

उत्तर -तीर्थंकर, उनके माता-पिता, बलभद्र, चक्रवर्ती, नारायण, प्रतिनारायण और भोगभूमिया जीव, इनके आहार तो है किन्तु नीहार नहीं है।

प्रश्न ३०-महाराजा अश्वसेन ने तीर्थंकर पाश्वॅकुुमार के समक्ष कितने वर्ष की उम्र में विवाह का प्रस्ताव रखा?

उत्तर -१६ वर्ष की उम्र में। प्रश्न ३१-तीर्थंकर पाश्वॅकुमार ने उसे स्वीकार किया अथवा नहीं?

उत्तर -तीर्थंकर पाश्वॅकुुमार ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और बाल ब्रह्मचारी रहे।

[सम्पादन] प्रश्न ३२-भगवान पार्श्वनाथ राजपुत्रों के साथ कहाँ विचरण कर रहे थे?=

उत्तर -वे राजपुत्रों के साथ हाथी पर सवार होकर बनारस के उध्यान में विचरण कर रहे थे।

प्रश्न ३३-वहाँ उन्होंने क्या देखा?

उत्तर -वहाँ उन्होंने एक तापसी साधु को पंचाग्नि तप करते देखा।

प्रश्न ३४-वह तापसी कौन था?

उत्तर -वह प्रभु पाश्वॅ के नाना थे अर्थात् माता वामादेवी के पिता थे।

[सम्पादन] प्रश्न ३५-उन्हें देखकर प्रभु पाश्वॅ ने क्या किया?

उत्तर -प्रभु पाश्वॅ बिना नमस्कार किए वहीं खड़े हो गए।

प्रश्न ३६-यह देखकर तापसी ने क्या सोचा?

उत्तर -तापसी ने सोचा कि मैं इसका नाना हूँ फिर भी यह मेरी विनय नहीं कर रहा है ऐसा सोचते-सोचते अतीव क्रोध में आकर वह हाथ में कुल्हाड़ी लेकर लकड़ी चीरने लगा।

प्रश्न ३७-तापसी को लकड़ी चीरते देख पाश्वॅकुमार ने क्या कहा?

उत्तर -पाश्वॅ ने कहा कि हे तापसी! यह काठ मत चीरो, इसमें नागयुगल बैठे हुए हैं।

प्रश्न ३८-यह सुनकर तापसी ने क्या किया?

उत्तर -यह सुन तापसी ने मारे क्रोध के लकड़ी के दो टुकड़े कर दिये।

[सम्पादन] प्रश्न ३९-क्या उस लकड़ी में सचमुच नागयुगल थे?

उत्तर -हाँ, उस लकड़ी में नागयुगल थे जो तापसी व्दारा दो टुकड़े करते ही नागयुगल के दो टुकड़े हो गए।

प्रश्न ४०-भगवान ने उन्हें कौन सा मंत्र सुनाया?

उत्तर -भगवान ने उन्हें दिव्य उपदेश देते हुए महामंत्र णमोकार सुनाया।

प्रश्न ४१-भगवान के उपदेश को सुनते हुए नागयुगल शरीर का परित्याग कर कहाँ गए?

उत्तर -देवयोनि में धरणेन्द्र और पद्मावती हो गए।

प्रश्न ४२-यह तापसी कौन था? क्या इसका पाश्वॅकुमार से वैर था?

उत्तर -यह कमठचर का जीव था, जो आनन्द मुनिराज की हत्या के पाप से पाँचवें नरक में जाकर सत्रह सागर की आयु तक असीम दुखों को भोगकर निकला और बहुत काल तक अर्थात् तीन सागर तक पशु योनि में त्रस-स्थावर पर्यायों को धारण करते हुए पुन: कुछ कर्मभार के हल्के हो जाने पर महीपालपुर में राजा महीपाल हुआ जिसकी पुत्री वामादेवी थीं।

[सम्पादन] प्रश्न ४३-राजा महीपाल ने तापसी वेष क्यों धारण किया?

उत्तर -पट्टरानी के मरण के अनंतर वियोगजन्य दुख से दु:खी होते हुए तापसी वेष धारण कर लिया।

प्रश्न ४४-इस घटना के अनन्तर तापसी मरण करके कहाँ जन्मा?</font color>

उत्तर -तापसी मरण करके कुतप के प्रभाव से शंबर नाम का ज्योतिषी देव हो गया। प्रश्न ४५-तीर्थंकर भगवान कौन सा भोजन करते हैं?

उत्तर -तीर्थंकर प्रभु गृहस्थावस्था में मत्यॅलोक का अन्न या वस्त्र नहीं ग्रहण करते हैं उनके लिए भोजन, वस्त्र आदि वस्तुएं इन्द्र अपने स्वर्ग से ले जाकर प्रदान करता है।

प्रश्न ४६-भगवान पार्श्वनाथ को वैराग्य किस निमित्त से हुआ?

उत्तर -अयोध्या नरेश जयसेन महाराज के व्दारा एक बार दूत से नाना प्रकार की वस्तुएं वाराणसी में भगवान पार्श्वनाथ के पास भेंट में भेजी गर्इं तब भगवान ने उससे अयोध्या का वैभव पूछा, तब दूत ने सविस्तार भगवान वृषभदेव के अवतार का वर्णन किया जिससे उन्हें राज्य सुख वैभव से वैराग्य हो गया।

[सम्पादन] प्रश्न ४७-उन्हें कितने वर्ष की उम्र में वैराग्य हुआ?

उत्तर -३० वर्ष की उम्र में।

प्रश्न ४८-भगवान के वैराग्य के समय कौन से स्वर्ग से कौन से देव आते हैं?

उत्तर -पाँचवें ब्रह्म स्वर्ग से लौकांतिक देव आते हैं।

प्रश्न ४९-भगवान कौन सी पालकी में बैठकर दीक्षा हेतु वन को रवाना हुए?

उत्तर -इन्द्र द्वारा लाई गई ‘विमला’ नाम की रत्नपालकी में बैठकर वन के लिए रवाना हुए।

[सम्पादन] प्रश्न ५०-भगवान पार्श्वनाथ ने कौन से वन में किस वृक्ष के नीचे दीक्षा ली?

उत्तर -भगवान पार्श्वनाथ ने अश्व नामक वन में वटवृक्ष के नीचे दीक्षा ली।

प्रश्न ५१-भगवान पार्श्वनाथ ने कौन सी तिथि में दीक्षा ली?

उत्तर -भगवान पार्श्वनाथ ने पौष वदी एकादशी तिथि में दीक्षा ली।

प्रश्न ५२-उनके साथ अन्य कितने राजाओं ने दीक्षा ली?
उत्तर -३०० राजाओं ने।

  1. 8B008B>प्रश्न ५३-तीर्थंकर भगवान को दीक्षा कौन प्रदान करता है?

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उत्तर -तीर्थंकर सिद्धों की साक्षीपूर्वक स्वयं दीक्षा लेते हैं।

[सम्पादन] प्रश्न ५४-भगवान के केशों का विसर्जन कौन, कहाँ करता है?

उत्तर -इन्द्रगण प्रभु के इन्द्रनीलमणि सदृश केशों को रत्नपिटारी में रखकर बड़े वैभव के साथ क्षीरसागर में विसर्जित करते हैं।

प्रश्न ५५-प्रभु ने दीक्षा के पश्चात् कितने दिन का उपवास किया?

उत्तर -प्रभु ने दीक्षा लेते ही तेले का नियम कर लिया।

प्रश्न ५६-भगवान को मन:पर्यय ज्ञान कब प्रगट होता है?

उत्तर -जन्म से ही मति, श्रुत और अवधि इन तीन ज्ञान के धारी प्रभु को दीक्षा लेते ही अन्तर्मुहूर्त में मन: पर्ययज्ञान प्रकट हो जाता है।

प्रश्न ५७-प्रभु को प्रथम आहार देने का सौभाग्य किसे प्राप्त हुआ?

उत्तर -प्रभु को प्रथम आहार देने का सौभाग्य गुल्मखेटपुर के महाराज ब्रह्मदत्त को मिला था।

[सम्पादन] प्रश्न ५८-भगवान पार्श्वनाथ पर उपसर्ग किसने और कब किया?

उत्तर -एक समय प्रभु योग में तन्मय हुए अपनी शुद्धात्मा में लीन थे तभी आकाशमार्ग से गमन करते हुए शंबर नामक ज्योतिषी देव का विमान वहाँ रुक गया, अवधिज्ञान के बल से पूर्व भव के वैर का स्मरण कर अत्यन्त कुपित होकर उसने प्रभु पर घोर उपसर्ग करना प्रारंभ कर दिया।

प्रश्न ५९-आकाशमार्ग से गमन करते हुए शंबरदेव का विमान क्यों रुका?

उत्तर -यह नियम है कि महापुरुषों के ऊपर से किसी भी देव या विध्याधर का विमान उल्लंघन कर नहीं जा सकता है।

प्रश्न ६०-इस उपसर्ग के प्रसंग में कौन से देव का आसन कंपायमान हो उठा?

उत्तर -धरणेन्द्र देव का।

प्रश्न ६१-उन्होंने उपसर्ग का निवारण किस प्रकार किया?

उत्तर -उन्होंने अवधिज्ञान के बल से प्रभु के उपसर्ग को जाना और अपने प्रति किए गए उपकार का चिंतन करते हुए अपनी भार्या पद्मावती देवी के साथ वहाँ आ गये। देव दंपती ने प्रभु की प्रदक्षिणा दी और बार-बार नमस्कार किया तथा प्रभु के मस्तक पर फण का छत्र तान दिया। धरणेन्द्र युगल को देखते ही वह पापी कमठचर भाग खड़ा हुआ।

[सम्पादन] प्रश्न ६२-उपसर्ग अथवा उपसर्ग निवारण का प्रभु पर क्या कोई असर हुआ?

उत्तर -प्रभु पर इनका कोई असर नहीं हुआ और वे सातिशय अप्रमत्त अवस्थारूप निर्विकल्प ध्यान में स्थिर हो गए और सत्तम गुणस्थान से ऊपर चढ़कर क्षपक श्रेणी में आरोहण करते हुए दशवें गुणस्थान में मोहनीय कर्म का निर्मूल नाशकर अघातिया कर्मों का क्रमश: नाशकर केवली परमात्मा हो गए।

प्रश्न ६३-केवलज्ञान होते ही प्रभु कहाँ विराजमान हो गए?

उत्तर -केवलज्ञान होते ही इन्द्र की आज्ञा से कुबेर ने अभूतपूर्व समवसरण की रचना कर दी, तत्क्षण ही प्रभु पृथ्वी से ५००० धनुष प्रमाण ऊपर आकाश में पहुँच गए।

प्रश्न ६४-जिस स्थान पर प्रभु का उपसर्ग दूर हुआ, वह स्थान किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर -जिस पवित्र स्थान में अहि-सर्प के रूप को धारणकर धरणेन्द्र ने प्रभु के ऊपर छत्र धारण किया था इसलिए उस स्थान का ‘अहिच्छत्र’ यह सार्थक नाम विश्व में प्रख्यात हो गया है।

प्रश्न ६५-भगवान पार्श्वनाथ की केवलज्ञान तिथि क्या है?

उत्तर -चैत्र कृष्णा चतुर्दशी।

[सम्पादन] प्रश्न ६६-भगवान के समवसरण में प्रथम गणधर कौन थे?

उत्तर -स्वयंभू स्वामी।

प्रश्न ६७-और अन्य कितने गणधर थे?

उत्तर -९ गणधर।

प्रश्न ६८-कितने मुनि और आर्यिकाएँ थीं?

उत्तर -१६००० मुनि एवं ३६ हजार आर्यिकाएँ थीं।

[सम्पादन] प्रश्न ६९-प्रधान गणिनी आर्यिका माता कौन थीं?=

उत्तर -गणिनी आर्यिका सुलोचना।

प्रश्न ७०-श्रावक-श्राविकाओं की संख्या कितनी थी?

उत्तर -१ लाख श्रावक एवं ३ लाख श्राविकाएं थीं।

प्रश्न ७१-शंबर नामक ज्योतिषी देव उपसर्ग के पश्चात् कहाँ गया?

उत्तर -शंबर नाम का ज्योतिषी देव काललब्धि पाकर शांत हो गया और प्रभु को बार-बार नमस्कार कर सम्यग्दर्शन को प्राप्त कर लिया।

प्रश्न ७२-उसको सम्यग्दर्शन प्राप्त करते देख वन में रहने वाले तापसियों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर -उसको देख उस वन में रहने वाले सात सौ तपस्वियों ने भी मिथ्यादर्शन छोड़कर संयम धारणकर लिया व सभी शुद्ध सम्यग्दृष्टि हो गए।

[सम्पादन] प्रश्न ७३-प्रभु ने धर्मोपदेश करते हुए कितने वर्ष तक विहार किया?

उत्तर -५ माह कम सत्तर वर्ष तक।

प्रश्न ७४-भगवान पार्श्वनाथ ने कहाँ से मोक्ष प्राप्त किया?

उत्तर -सम्मेदशिखर पर्वत से।

प्रश्न ७५-कौन सी तिथि में भगवान को निर्वाण प्राप्त हुआ?

उत्तर -श्रावण शुक्ला सप्तमी।

प्रश्न ७६-उस तिथि को किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर -मोक्षसप्तमी पर्व के नाम से।