ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

11.मांसाहार नैतिक व आध्यात्मिक पतन का कारण

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


मांसाहार नैतिक व आध्यात्मिक पतन का कारण

Stoc.jpg
Stoc.jpg
Stoc.jpg
Stoc.jpg

मनुष्य की भावना ही उसके कर्मो को प्रकाशित करती है । जिसमें अहिंसा दया परोपकार आदि की भावना है वह ऐसा कोई कर्म करना या कराना नहीं चाहेगा जिससे किसी अन्य प्राणी को पीड़ा पहुंचे । जो किसी प्राणी को कष्ट में देख कर द्रवित हो जाता है ऐसी भावना वाला व्यक्ति मासाहग्र की तो कल्पना द्यई नहीं कर सकता, किन्तु जिनकी भावना इसके विपरीत है, जो हिसा रूररने, ङ्ग[रर्ता करने व अपने स्क र्थ के लिये दूसरों को कष्टों मे डालने में संकोच न करने की वृत्ति रखते है उनके लिये मांसाहार तो क्या वे कोई भी अनैतिक कार्य कर सकते हैं । जिसकी भावना पशु की गर्दन पर छुरी चलवाने में आहत नहीं होती उसकी इन्सान पर गोली चलाने में भी क्या आहत होगी । जो अपने स्वाद या स्वास्थ्य लाभ के लिए पशु ?? कटवा कर उसका मांस खा सकता है वह अपनी अन्य -ग्राका क्षाउगें की पूर्ति के लिए, व्यापार, लेन देन, पद प्रतिष्ठा आदि प्राप्त करने में भी किसी की हिंसा करने या कराने में क्या संकोच करेगा । ऐसी स्वा र्थ भावना वाले व्यक्ति से जीवन के किसी भी क्षेत्र में -किस आचार संहिता पर चलने की उगशा की जा सकती है ।

मांसाहार से मस्तिष्क की सहनशीलता व स्थिरता का हास होता है, वासना व उत्तेजना बढ़ाने वाली प्रवृति पनपती है, क्रूरता व निर्दयता बढ़ती है । जब किसी बालक को शुरू से ही मांसाहार कराया जाता है तो वह अपने स्वार्थ के लिये दूसरे जीवो का मास खाना, उन्हें पीड़ा देना, मारना आदि कार्यो को इतने सहज भाव से ग्रहण कर लेता है कि उसे किसी की हत्या करने, क्रूरता व हिंसक कार्य करने में कुछ गलत महसूस ही नहीं होता । अहिंसा, दया परोपकार की भावना तो उसमें पनप ही नहीं पाती । उसमें केवल स्वार्थ लाभ बनई भावना ही पनपती है जो उसे अपने तुच्छ स्वार्थ के लिये, जाति व देश तक का अहित करने से नहीं रोकती ।

मासाहार द्वारा कोमल सद्भावनाओं का नाश त्[ाएना व स्वा प्रर्न निर्दयता आदि भावनाओं का पनपना ही आज विश्व में बढ़ती हुई हिंसा, घृणा व दुष्कर्मो का मुख्य कारण है । मांसाहार वासनाओं को भड़काता है, और वासनाएं जितनी पूरी की जाती हैं उतनी अधिक भड़कती हैं इनकी कभी तृप्ति नहीं होती । जब इनकी तृप्ति में बाधा आती है तो क्रोध उत्पन्न होता है, क्रोध से सही गलत का विवेक समाप्त हो जाता है, जिससे बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि नष्ट होने से पथ भ्रष्ट हो जाते हैं अथवा सर्वनाश हो जाता है । अर्थात् मांसाहार सर्वनाश की ओर ले जाता है ।

जैसा कि इस पुस्तक में पहले बताया गया हैं कि अपराधियों के सर्वेक्षण से भी यह पता लगा कि 75०7० अपराधी मांसाहारी हैं तो केवल 25०7० शाकाहारी । अर्थात् मांसाहार से आपराधिक प्रवृत्ति भी बढ़ती है ।

अत : हम देखते हैं कि मांसाहार अन्य हानियों के अलावा विश्व में बढ़ती हुई हिंसा, अमानुषिकता, दुष्कर्मों आदि का कारण व मानव को सर्वनाश की ओर ले जाने वाला भी है । इसे रोकना हम सब का कर्तव्य है, यदि हमने ऐसा नहीं किया तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेगें ।

प्राय : यह देखने में आता हैं कि दुष्कर्मो बलात्कार, हत्या निदर्यतापूर्ण कार्य करने वाले व्यक्ति साधारण स्थिति में ऐसे दुष्कर्म नहीं करते, अपितु इन कुकर्मो के करने से पहले वे शराब मांसाहार आदि का सेवन करते हैं ताकि उनका विवेक, मानवीयता व नैतिकता नष्ट हो जाए और उन्हें इन कुकर्मो को करने से रोके नहीं । अर्थात् जब कोई अनुचित कार्य करने को अन्तरात्मा तैयार नहीं होती तो उसकी आवाज को अनसुनी -करने के लिए ये पदार्थ लेते हैं । दुर्भाग्य से आज तो लोग केवल फैशन आधुनिकता व स्तर (Status) का दिखावा करने के लिए मांसाहार करते हैं और यह भी सर्वविदित हैं कि ऐसे व्यक्तियों का नैतिक स्तर क्या बन रहा है । यह उनका अन्तर्मन स्वयं जानता हइऐ ।

कुछ शाकाहारी व्यक्ति भी अपने को आधुनिक दिखाने की होड़ में शाकाहारी पदार्थों से पशु-पक्षियों की आकृति के भोजन तैयार करा कर उन्हें मांसाहारियों की भांति इस प्रकार खाते हैं मानों वे भी मांसाहारी हैं । ऐसा शाकाहारी भोजन करना यद्यपि स्वास्थ्य की दृष्टि से बुरा नहीं है, किन्तु भावनात्मक दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि हमारी भावना ही कर्मो को प्रेरित करती है । ऐसा शाकाहारी भोजन करते हुए भी, भावना तो यही हैं कि हम दृस्रे प्राणी को काट कर खाने का आनन्द ले रहे हैं । यह भावना हमें अहिंसा, दया, प्रेम जैसे गुणों से दूर ले जा कर हिंसा, क्रूरता आदि की ओर प्रेरित करेगी और देर सवेर से हमें, नहीं तो आने वाली पीढ़ी को तो मांसाहारी बना ही देगी ।