ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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15.सामूहिक नृत्य गीत

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सामूहिक नृत्य गीत

तर्ज-रंग बरसे भीगे चुनर वाली.......

रंग छलके ज्ञान गगरिया से रंग छलके........
हो.....रंग छलके ज्ञान गगरिया से रंग छलके.......हो......।।टेक.।।
जग को होली का रंग सुहाता-2
तुमको सुहाती ज्ञान गंग, जगत तरसे रंग छलके......हो......।।1।।
जग को सुहाती, जयपुर की चुनरिया-2
तुम्हें भाती चरित्र चुनरिया, जो मन हरषे रंग छलके......हो......।।2।।
जग को सुहाते, रत्नन के गहने-2
तुम्हें भाते ज्ञान के गहने, रतन बरसे रंग छलके......हो......।।3।।
जग को सुहाती, विषयों की लाली-2
तुमको सुहाती जिनवाणी, जगत झलके रंग छलके......हो......।।4।।
कहे ‘‘चन्दना’’ सब मिल आओ-2
हम भी सुनें जिनवाणी, ज्ञान बरसे रंग छलके.....हो.....।।5।।