ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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16.ब्रह्मचर्य रक्षावर्ती प्रश्नोत्तरी

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ब्रह्मचर्य रक्षावर्ती

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प्रश्न ३५९—ब्रह्म किसे कहते हैं ?
उत्तर —समस्त पदार्थों से भिन्न और ज्ञान का स्थान जो आत्मा है वह ब्रह्म है।

प्रश्न ३६०—ब्रह्मचर्य किसे कहते हैं ?
उत्तर —परब्रह्म में जो चर्या है अर्थात् एकाग्रता है वही ब्रह्मचर्य है।

प्रश्न ३६१—ब्रह्मचर्य कितने प्रकार का है ?
उत्तर —ब्रह्मचर्य दो प्रकार का है—१. अन्तरंग ब्रह्मचर्य, २. बाह्य ब्रह्मचर्य।

प्रश्न ३६२—अन्तरंग ब्रह्मचर्य की परिभाषा बताइये ?
उत्तर —ज्ञनस्वरूप आत्मा में जो शरीर विषय ममता रहित मुनि के मन की एकाग्रता है वह अंतरंग ब्रह्मचर्य है।

प्रश्न ३६३—बाह्य ब्रह्मचर्य किसे कहते हैं ?
उत्तर —बाह्य में जो वृद्ध स्त्री को माता के समान, बराबर की स्त्री को बहन के समान तथा छोटी स्त्री को पुत्री के समान समझता है वह उस पुरुष का बाह्य ब्रह्मचर्य है।

प्रश्न ३६४—ब्रह्मचारी कौन हो सकता है ?
उत्तर —दोनों प्रकार के ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला ब्रह्मचारी होता है।

प्रश्न ३६५—यदि शयन आदि अवस्था में मुनि को अतिचार लगे तो वे क्या करते हैं ?
उत्तर —यदि शयन आदि अवस्था में मुनि को अतिचार लगे तो वे प्रायश्चित्त करते हैं।

प्रश्न ३६६—क्या गरिष्ठ भोजन आदि से ब्रह्मचर्य व्रत नष्ट होता है ?
उत्तर —नाहीं, गरिष्ठ भोजन आदि से ब्रह्मचर्य व्रत नष्ट नहीं होता है।

प्रश्न ३६७—ब्रह्मचर्य की रक्षा कैसे होती है ?
उत्तर —साधु के दृढ़ मन का जो संयम है वही ब्रह्मचर्य की रक्षा करता है।

प्रश्न ३६८—संयम कितने प्रकार का है ?
उत्तर —संयम दो प्रकार का है—(१) बाह्य संयम, (२) अन्तरंग संयम।

प्रश्न ३६९—बाह्य मन का संयम क्या है ?
उत्तर —ज्ञानी मुनि के यथाशक्ति होने वाले जो मूलगुण अथवा उत्तरगुण हैं उनका यथायोग्य जो रक्षण करना है वह बाह्य मन का संयम है।

प्रश्न ३७०—अंतरंग मन का संयम क्या है ?
उत्तर —सदा आनन्द के करने वाले कार्य को पैदा करने वाला चैतन्य तथा मन के समरसीभाव से जो मन का संयम होता है वह अंतरंग मन का संयम है।

प्रश्न ३७१—व्रती को क्या प्रयत्न करना चाहिए ?
उत्तर —त्यागी—व्रती को समस्त स्त्रियों के त्याग करने में बड़ा प्रयत्न करना चाहिए।

प्रश्न ३७२—आचार्यों ने स्त्री को किसकी उपमा दी है ?
उत्तर —आचार्यों ने स्त्री को मुक्तिद्वार के रोकने के लिए अर्गला, संसाररूपी वृक्ष को सींचने के लिए नाली और मनुष्य रूपी मृगों को बांधने के लिए मोहरूपी व्याघ्र द्वारा बनाए गए जाल की उपमा दी है।

प्रश्न ३७३—मुनीश्वरों के लिए स्त्रियों के विषय में क्या कहा गया है ?
उत्तर— मुनीश्वरों को स्त्री का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए।

प्रश्न ३७४—ब्रह्मचर्य में विकलता होने पर क्या परिणाम होता है ?
उत्तर —यदि ब्रह्मचर्य में किसी कारण से विकलता हो जावे तो दूसरे—दूसरे समस्त व्रत नष्ट हो जाते हैं और उस समय उस ब्रह्मचर्य के बिना यति के व्रतीपना तथा गृहस्थपना दोनों नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न ३७५—स्त्री के शरीर की शोभा कैसी है ?
उत्तर —स्त्री के शरीर की शोभा क्षणभंगुर है।

प्रश्न ३७६—विद्वान लोग स्त्री के विषय में क्या चितन करते हैं ?
उत्तरविद्वान लोग स्त्री में राग नहीं करते क्योंकि वह सोचते हैं कि स्त्री का शरीर अपवित्र है।

प्रश्न ३७७—स्त्री और धन के त्यागी मुनि को क्या कहा है ?
उत्तर —जो मुनि स्त्री तथा धन का त्यागी है वह देवों का देव है और सभी के द्वारा पूज्यनीय है।

प्रश्न ३७८—चार गतियों में किस गति से मोक्ष की प्राप्ति सम्भव है ?
उत्तर —मनुष्य गति से ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

प्रश्न ३७९—मनुष्य भव को पाकर क्या करना चाहिए ?
उत्तर— भव्य जीवों को मनुष्य भव पाकर तप करना चाहिए।