ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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16.मांसाहार से छुटकारा कैसे पाएं

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मांसाहार से छुटकारा कैसे पाएं ?

पुस्तकों में वर्णित शाकाहार व मांसाहार के गुण दोषों को समझने व मांसाहार से होने वाले रोगों व हानियों को जानने के बाद जो भाई बहिन मांसाहार को त्याग कर शाकाहारी बनना चाहते हैं, किंतु सामाजिक व पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अथवा स्वाद के वश इसको त्यागने में संकोच अनुभव करते हों, उन्हें हमारे विचार से निम्न उपाय करने चाहिये ।---

1. मांसाहार से होने वाली हानियों को बार-बार पढ़कर मांसाहार त्यागने के साधारण विचार को एक दृढ़ चाह में बदलें क्योंकि चाह से ही राह मिलती है बिना दृढ़ -चाह के सफलता नहीं मिलती ।

2. यह निश्चित तौर पर समझ लें कि मांसाहार का त्याग एक समाज सुधार व परिवार कल्याण का कार्य है । यह आपको आधुनिकता की ओर ले जाने वाला कार्य है क्योंकि वही व्यक्ति आधुनिक होता है जो नई खोजों को जानकर उन पर औरों से आगे चले । शाकाहारी होना गर्व की बात समझें ।

3. अपने मन को भली- भांति समझा दें कि मांसाहार के त्याग से किसी भी प्रकार की शारीरिक दुर्बलता नहीं आती अपितु कैंसर आदि रोगों से बचाव होता है व शरीर अधिक हृष्ट-पुष्ट होता है ।

4. प्रारंभ में कुछ दिनों तक अपने स्वाद के अनुकूल शाकाहारी पदार्थो से ही बने कबोब आदि व देखने में मांसाहारी प्रतीत होने वाले व्यंजन ले सकते हैं । बाद में साधारण शाकाहारी भोजन पर आ जाएं ।

5. घर में डाइनिंग टेबल व रसोईघर में मांसाहार की हानियाँ दर्शाने वाला कोई वाक्य जैसे 'मांसाहार रोगों का भण्डार ' आदि लिखकर लगा दें ताकि उस पर दृष्टि पड़ती रहे और परिवार के सभी सदस्यों को मांसाहार छोड़ने की बात याद रहे ।

6. मांसाहारी भोजन की प्लेट देखकर पशुओं पर होने वाले अत्याचार व उनकी वेदना की कल्पना करें और सोचें कि क्या यह अपने किसी पूर्व जन्म के संबंधी के मांस से ही तो बना हुआ नहीं है ।

7. उपरोक्त प्रयास करने के बाद भी यदि आप एकदम मांसाहार नहीं त्याग पाएं तो सात सप्ताह का एक सीमित कार्यक्रम बना लें । पहले सप्ताह में एक दिन मांसाहार न करें, दूसरे सप्ताह में दो दिन न करें और इसी प्रकार प्रति सप्ताह एक दिन बढ़ाकर सातवें सप्ताह में मांसाहार बिलकुल ही त्याग दें । मांसाहार के त्यागने में केवल मन के दृढ़ निश्चय की ही आवश्यकता है । इसको छोड़ने से कोई भी असुविधा नहीं होती । नित्य मांसाहार करने वाले अनेकों व्यक्तियों ने इसका एकदम परित्याग कर दिया है । अत : आप भी इसका एकदम परित्याग कर सकते हैं मन में दृढ़ निश्चय कर आज ही इस सर्वनाश करने वाले भोजन से अपना पिण्ड छुडाएं ।

मन के हारे हार है , मन के जीते जीत ।
नहीं खाऊँगा मांस मैं , कहें इसी क्षण मीत ।।