ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्याग भावनायै नमः"

17. जैन र्कीतिस्तम्भ

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जैन कीर्तिस्तम्भ

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यह कीर्तिस्तम्भ राजस्थान प्रांत के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। ७६ फुट ऊँचा, तलभाग का व्यास ३१ फुट और ऊपरी भाग का व्यास १५ फुट है। भीतर ऊपरी मंजिलों पर चढ़ने के लिए ६७ सीढ़ियाँ हैं। इस कीर्तिस्तम्भ में सात मंजिल हैं। कीर्तिस्तम्भ को दिगम्बर सम्प्रदाय के बघेरवाल महाजन के साह सेठ के पुत्र जीजा ने स्वयं अपने हाथ से कमाये हुए द्रव्य से निर्माण कराया था। इसे वि. सं. की चौदहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में बनवाया था। यह कीर्तिस्तम्भ भगवान आदिनाथ का स्मारक है। यह भारतीय स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इसके चारों पार्श्व पर आदिनाथ की एक—एक विशाल दिगम्बर जैन मूर्तियां खुदी हुई हैं। गौरव की बात है दी बैंक ऑफ राजस्थान ने अपना मोनो कीर्तिस्तम्भ को बनाया था।