Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


डिप्लोमा इन जैनोलोजी कोर्स का अध्ययन परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक प्रतिदिन पारस चैनल के माध्यम से कराया जा रहा है, अतः आप सभी अध्ययन हेतु सुबह 6 से 7 बजे तक पारस चैनल अवश्य देखें|

१८ अप्रैल से २३ अप्रैल तक मांगीतुंगी सिद्धक्ष्रेत्र ऋषभदेव पुरम में इन्द्रध्वज मंडल विधान आयोजित किया गया है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

18.ध्वज गीत

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


ध्वज गीत

—प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती
तर्ज-फूलों सा..........

केशरिया झण्डा मेरा, जिनमत की पहचान है।
साथिया निशान है, जैनियों की शान है, उत्सव का सम्मान है।। टेक.।।
जिनवर के मंदिर शाश्वत बने जो,
उन सब पे भी ध्वज लहराते हैं।
रत्नों से निर्मित फिर भी हवा के,
चलने से वे ध्वज लहराते हैं।
देव वहाँ जाते, कीर्ति प्रभु की गाते, जिनचैत्य की वंदना कर रहे।
जय जय हो, जय जय प्रभो, केशरिया ध्वज धाम है।। साथिया।।१।।
आकाश की ऊँचाई को कहता,
झण्डा यह देखो फहराया है।
फूलों से गूंथा घंटी से गूंजा,
जिनवाणी का स्वर लहराया है।
महामहोत्सव में, आज के उत्सव में, ‘‘चन्दनामती ध्वज वंदन करो।
जय जय हो, जय जय प्रभो, केशरिया ध्वज धाम है।। साथिया।।२।।