Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


डिप्लोमा इन जैनोलोजी कोर्स का अध्ययन परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी द्वारा प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक प्रतिदिन पारस चैनल के माध्यम से कराया जा रहा है, अतः आप सभी अध्ययन हेतु सुबह 6 से 7 बजे तक पारस चैनल अवश्य देखें|

१८ अप्रैल से २३ अप्रैल तक मांगीतुंगी सिद्धक्ष्रेत्र ऋषभदेव पुरम में इन्द्रध्वज मंडल विधान आयोजित किया गया है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

19. मंडप प्रतिष्ठा विधान

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


मंडप प्रतिष्ठा विधान

चाल—शेर—

ॐ मणिमयी स्तंभ से उँचा महामंडप।
दसविध ध्वजाओं से महारमणीय है मंडप।।
तोरण चंदोवा चंवर छत्र पुष्पहार से।
अतिशोभता मंगल कलश व धूप घटों से।।१।।
मंडपांत: पुष्पांजलिं क्षिपेत्।

(मंडप के अन्दर सब तरफ और भूषण आदि वस्तुओं पर पृथक्-पृथक् चंदन से सहित पुष्पांजलि क्षेपण करें। पुन: मंडप पर पाँच मंगल कलश स्थापित करें।)

ये पंचरंग सूत्र सुपवित्र सूत्र है।
सूत्रोक्त तप्व के समान श्रेष्ठ सूत्र है।।
पूजन विधान मंडप को चार ओर से।
मैं तीन बार वेष्टित करता हूँ सूत्र से।।२।।

(इस मंडप को बाहर से पंचरंगी कलावा से तीन बार वेष्टित करें। इसे वेष्टित करते समय शांतिजिनं शशि—आदि शांति पाठ बोलने की परम्परा भी देखी जाती है।)

जिनवर समवसरण में शोभे श्रीमंडप।
उसके समान तीन लोक लक्ष्मी का मंडप।।
सब पापताप खंडे ऐसा है ये मंडप।
मैं अर्घ देय पूजूँ ये सौख्य का मंडप।।३।।
ॐ ह्रीं श्रीमंडपाय अर्घं समर्पयामि स्वाहा।

(मंडप के लिए अर्घ चढ़ायें)