ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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20.चतुर्विंशति तीर्थंकर स्तोत्र प्रश्नोत्तरी

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चतुर्विंशति तीर्थंकर स्तोत्र

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प्रश्न ४४३—जीवों का वैरी कौन है ?
उत्तर—जीवों का संसार ही एक वैरी है।

प्रश्न ४४४—जीवों का मित्र कौन है ?
उत्तर—सम्यग्दर्शनादि रत्नत्रय ही जीवों के मित्र हैं।

प्रश्न ४४५—सुमति किसे कहते हैं ?
उत्तर—जिसकी बुद्धि शोभन होवे उसको सुमति कहते हैं।

प्रश्न ४४६—संसार में सबसे शीतल वस्तु क्या है ?
उत्तर—यद्यपि संसार में चन्द्रमा तथा चंदन भी शीतल पदार्थ हैं तथा ताप के दूर करने वाले हैं किन्तु भगवान के वचन अत्यन्त शीतल तथा समस्त संसार के ताप को दूर करने वाले हैं।

प्रश्न ४४७—आत्मा कब तक व्याकुल रहता है ?
उत्तर—जब तक इस आत्मा के साथ कर्मों का संबंध रहता है तब तक ‘‘यह मेरा है, यह तेरा है’’ इस प्रकार के विकल्पों को करते हुए यह सदा व्याकुल ही रहा करता है।

प्रश्न ४४८—आत्मा शांत कब होता है ?
उत्तर—जिस समय कर्म आत्मा से जुदे हो जाते हैं उस समय विकल्पों से रहित होने के कारण आत्मा शांत हो जाता है।

प्रश्न ४४९—विशुद्धि की प्राप्ति कब होती है ?
उत्तर—जिस समय ‘‘यह मेरा है’’, ऐसे मूच्र्छा लक्षण परिग्रह का संबंध आत्मा से छूट जाता है उस समय विशुद्धि की प्राप्ति होती है।

प्रश्न ४५०—सुव्रत किसे कहते हैं ?
उत्तर—जो उत्तम व्रतों को धारण करने वाला हो उसको सुव्रत कहते हैं।

प्रश्न ४५१—इन्द्रियों से उत्पन्न हुआ सुख कैसा है ?
उत्तर—इन्द्रियों से उत्पन्न हुआ सुख पराधीन है, वास्तविक सुख से भिन्न है, अत्यन्त दुर्बल है, चंचल है और वह सुख नहीं दु:ख स्वरूप ही है।

प्रश्न ४५२—आत्मसंबंधी सुख कैसा है ?
उत्तर—आत्मसंबंधी सुख स्वाधीन है, अपना है, दुर्बलतारहित है, स्थिर है और वही वास्तविक सुख है।

प्रश्न ४५३—भगवान नेमिनाथ का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर—अरिष्टनेमि।

प्रश्न ४५४—भगवान नेमिनाथ ने कहाँ से मोक्ष प्राप्त किया ?
उत्तर—भगवान नेमिनाथ ने गिरनार पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया।

प्रश्न ४५५—भगवान पार्श्वनाथ के ऊपर उपसर्ग किसने किया ?
उत्तर—कमठासुर ने।

प्रश्न ४५६—क्या तीर्थंकर आदि महापुरुषों के ऊपर से किसी देव का विमान जा सकता है ?
उत्तर—नहीं।

प्रश्न ४५७—भगवान पार्श्वनाथ का उपसर्ग निवारण किसने किया ?
उत्तर—धरणेन्द्र ने भगवान के मस्तक पर अपना फण फैलाकर मेघ का निवारण किया तथा पद्मावती ने आसन बनकर भगवान के उपसर्ग का निवारण किया।