ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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23.क्रियाकांड चूलिका प्रश्नोत्तरी

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क्रियाकांड चूलिका

प्रश्न ४७४—आकाश द्रव्य कैसा है ?
उत्तर—आकाश द्रव्य अनंत है और सब जगह व्याप्त है।

प्रश्न ४७५—संसारी प्राणी भगवान की स्तुति क्यों करता है ?
उत्तर—संसारी प्राणी अपने चित्त में प्राप्त भक्ति के निवेदन के लिए ही भगवान की स्तुति करते हैं।

प्रश्न ४७६—भगवान के नाम मात्र के स्मरण से क्या फल मिलता है ?
उत्तर—जो भक्त मनुष्य भगवान के नाम मात्र को भी स्मरण करता है अथवा भगवान के नाम को वचन द्वारा कहता है उस मनुष्य को संसार में समस्त प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।

प्रश्न ४७७—मोक्ष के लिए तत्वज्ञान की प्राप्ति तथा सम्यग्चारित्र की प्राप्ति किससे होती है ?
उत्तर—मोक्ष के लिए तत्वज्ञान की प्राप्ति तथा सम्यग्चारित्र की प्राप्ति शास्त्रों से हो सकती है।

प्रश्न ४७८—शरीर की कांति को कौन नष्ट करता है ?
उत्तर—वृद्धावस्था शरीर की कांति को नष्ट करती है।

प्रश्न ४७९—संसार में दुर्लभ वस्तु क्या है ?
उत्तर—रत्नत्रय की प्राप्ति संसार में सर्वथा दुर्लभ है।

प्रश्न ४८०—संसार में जीवों को अलभ्य क्या है ?
उत्तर—संसार में जीवों को अतीन्द्रिय सुख के देने वाले भगवान के चरण कमल ही अलभ्य हैं।

प्रश्न ४८१—गुप्ति कितने प्रकार की होती है, नाम बताइये ?
उत्तर—गुप्तियाँ तीन प्रकार की होती हैं—(१) मनगुप्ति (२) वचनगुप्ति (३) कायगुप्ति।

प्रश्न ४८२—प्राणी कर्मों का उपार्जन कैसे करता है ?
उत्तर—चिंता से, खोटे परिणामों की संतति से, खोटे मार्ग में गमन करने वाली वाणी से और संवर रहित शरीर से प्राणी कर्मों का उपार्जन करता है।

प्रश्न ४८३—किसकी स्मृति पाप कर्मों को नाश करने में समर्थ है ?
उत्तर—जिनेन्द्रदेव के चरण कमलों की स्मृति समस्त पाप कर्मों का नाश करने में समर्थ है।

प्रश्न ४८४—सर्वज्ञदेव की वाणी कैसी है ?

उत्तर—सर्वज्ञदेव की वाणी स्याद्वाद रूपी कान्ति से युक्त है, समस्त तत्त्वों को प्रकट करने वाली है और तीन लोक रूपी धर्म की उत्कृष्ट दीपक की शिखा के समान है।