ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी के द्वारा अागमोक्त मंगल प्रवचन एवं मुंबई चातुर्मास में हो रहे विविध कार्यक्रम के दृश्य प्रतिदिन देखे - पारस चैनल पर प्रातः 6 बजे से 7 बजे (सीधा प्रसारण)एवं रात्रि 9 से 9:20 बजे तक|
इस मंत्र की जाप्य दो दिन 18 और 19 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्याग भावनायै नमः"

28. सीता ने मुनिरामचन्द्र को विचलित करने का प्रयास किया

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


सीता ने मुनिरामचन्द्र को विचलित करने का प्रयास किया

(२७०)

कई वर्षों तक श्री रामचंद्र, मुनि वन में सुनो विहार किया।
फिर कोटिशिला पर जाकर के, निजयोगलीन हो ध्यान किया।।
सीता ने जाकर स्वर्गों में, निज अवधिज्ञान से ये जाना।

श्री रामचंद्र हैं ध्यानरूढ़, तब उनका मन भी ना माना।।
(२७१)

सोचा यदि विचलित कर दूँ मैं, तो मोक्ष नहीं ये जायेंगे।
और यहाँ स्वर्ग में आ करके, ये मेरे मित्र बन जायेंगे।।
यह सोच दिखाए हावभाव, नैना कटाक्ष कर बार चले।

हर अंग—प्रत्यंग दिखाकर के, मुस्कानों के उपहार चले।।
(२७२)

कितनी ही नृत्य क्रियाओं से,तिरिया चरित्र सब दिखा थकीं।
पर रामचंद्र के प्रियमन में, वे नहीं वासना जगा सकीं।।
जिसका प्रहरी चारित्र बने, उसकी कब जग में हार हुई।

जो भी टकराई शक्ति आ, वो आखिर में लाचार हुई।।