ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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Parisatana kriti

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परिशानत कृति Dissociation of karmas without accumulation of mattergic aggregate. विवक्षित शरीर के पुद्गल स्कन्र्धों की संचय के बिना जो निर्जरा होती है वह परिशानत कृति कहलाती है।