ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

Paryapti

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पर्याप्ति The gaining by the soul of the capacity to develop fully the characteristics of the body into which it incarnates. योनि स्थान मे जीव के प्रवेश होने के पश्चात् अन्तर्मुहर्त मे आहार, शरीर, इन्द्रिय, श्वासोच्छ्वास, भाषा एंव मन, इन 6 पर्यात्तियो की पूर्णता होना जो पूर्ण शारीरिक विकास के लिए आधारभूत है।