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अभिनंदननाथ की आरती

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'भगवान श्री अभिनंदननाथ की आरती-४

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तर्ज—मैं तो भूल चली...........

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अभिनंदन प्रभू जी की आज, हम सब आरति करें।
बड़ा सांचा प्रभू का दरबार, सब मिल आरति करें।।टेक.।।
राजा स्वयंवर के घर जब थे जन्में,
इन्द्रगण आ मेरू पे अभिषेक करते,
नगरी अयोध्या में खुशियां अपार, प्रजाजन उत्सव करें,

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अभिनंदन प्रभू जी की ......।।१।।
माघ सुदी बारस की तिथि बनी न्यारी,
प्रभुवर ने उग्र वन में दीक्षा थी धारी,
त्रैलोक्य पूज्य प्रभुवर की आज, सब मिल आरति करें,

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अभिनंदन.............।।२।।
पौष सुदी चौदस में केवल रवि प्रगटा,
प्रभु की दिव्यध्वनि सुनकर जग सारा हर्षा,
केवलज्ञानी प्रभुवर की आज, सब मिल आरति करें,

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अभिनंदन.............।।३।।
शाश्वत निर्वाणथली सम्मेद गिरि है,
वहीं पे प्रभू ने मुक्तिकन्या वरी है,
मुक्तिरमापति प्रभू की आज, सब मिल आरति करें,

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अभिनंदन.............।।४।।
प्रभु तेरे द्वारे हम आरति को आए,
आरति के द्वारा भव आरत मिटाएं,
‘‘चंदनामति’’ मिले शिवमार्ग, सब मिल आरति करें

अभिनंदन............।।५।।
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