"अरहनाथ पूजा" के अवतरणों में अंतर

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==<center><font color=#800000>'''''भगवान श्री अरहनाथ जिनपूजा'''''</font color></center>==
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<center><font color=#C71585>'''दोहा'''</font color><br />
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<poem><center><font color=#C71585>'''दोहा'''</font>
 
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<font color=green>तीर्थंकर अरनाथ! तुम, चक्ररत्न के ईश।<br />
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<font color=green>तीर्थंकर अरनाथ! तुम, चक्ररत्न के ईश।
ध्यान चक्र से मृत्यु को, मारा त्रिभुवन ईश।।१।।<br />
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ध्यान चक्र से मृत्यु को, मारा त्रिभुवन ईश।।१।।
आह्वानन विधि से यहाँ, मैं पूजूँ धर प्रीत।<br />
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आह्वानन विधि से यहाँ, मैं पूजूँ धर प्रीत।
रोग शोक दु:ख नाशकर, लहूँ स्वात्म नवनीत।।२।।</font color><br />
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रोग शोक दु:ख नाशकर, लहूँ स्वात्म नवनीत।।२।।</font>
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवोषट् आह्वाननं।'''<br />
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवोषट् आह्वाननं।'''
'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।'''<br />
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'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।'''
'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।'''</font color><br />
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'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।'''</font>
  
<font color=#C71585>'''अष्टक-अडिल्ल छंद'''</font color><br />
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<font color=#C71585>'''अष्टक-अडिल्ल छंद'''</font>
  
<font color=green>सिंधुनदी को नीर, स्वर्णझारी भरूँ।<br />
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<font color=green>सिंधुनदी को नीर, स्वर्णझारी भरूँ।
मिले भवोदधितीर, तीन धारा करूँ।।<br />
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मिले भवोदधितीर, तीन धारा करूँ।।
श्री अरनाथ जिनेन्द्र, जजूँ मन लाय के।<br />
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श्री अरनाथ जिनेन्द्र, जजूँ मन लाय के।
समतारस पीयूष, चखूँ तुम पाय के।।१।।</font color><br />
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समतारस पीयूष, चखूँ तुम पाय के।।१।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>केशर चंदन घिसा, कटोरी में भरा।<br />
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<font color=green>केशर चंदन घिसा, कटोरी में भरा।
रागदाह हरने को, चर्चूं सुखकरा।।श्री अर.।।२।।</font color><br />
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रागदाह हरने को, चर्चूं सुखकरा।।श्री अर.।।२।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय संसारतापविनाशनाय चंदनं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय संसारतापविनाशनाय चंदनं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>चंद्रकिरण सम उज्ज्वल, अक्षत ले लिये।<br />
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<font color=green>चंद्रकिरण सम उज्ज्वल, अक्षत ले लिये।
तुम आगे मैं पुंज, धरूँ सुख के लिए।।श्री अर.।।३।।</font color><br />
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तुम आगे मैं पुंज, धरूँ सुख के लिए।।श्री अर.।।३।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>चंपा जुही गुलाब, पुष्प सुरभित लिये।<br />
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<font color=green>चंपा जुही गुलाब, पुष्प सुरभित लिये।
भव विजयी के चरणों, में अर्पण किये।।श्री अर.।।४।।</font color><br />
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भव विजयी के चरणों, में अर्पण किये।।श्री अर.।।४।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय कामबाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय कामबाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>मालपुआ रसगुल्ला, बहु मिष्टान्न ले।<br />
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<font color=green>मालपुआ रसगुल्ला, बहु मिष्टान्न ले।
क्षुधारोग हर हेतु, चढ़ाऊँ नित भले।।श्री अर.।।५।।</font color><br />
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क्षुधारोग हर हेतु, चढ़ाऊँ नित भले।।श्री अर.।।५।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>घृत दीपक ले करूँ, आरती नाथ की।<br />
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<font color=green>घृत दीपक ले करूँ, आरती नाथ की।
मोहध्वांत हर लहूँ, भारती ज्ञान की।।श्री अर.।।६।।</font color><br />
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मोहध्वांत हर लहूँ, भारती ज्ञान की।।श्री अर.।।६।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>अगर तगर वर धूप, अग्नि में खेवते।<br />
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<font color=green>अगर तगर वर धूप, अग्नि में खेवते।
कर्म दूर हो नाथ! चरण युग सेवते।।श्री अर.।।७।।</font color><br />
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कर्म दूर हो नाथ! चरण युग सेवते।।श्री अर.।।७।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अष्टकर्मविध्वंसनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अष्टकर्मविध्वंसनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>श्रीफल पूग बदाम, आम केला लिये।<br />
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<font color=green>श्रीफल पूग बदाम, आम केला लिये।
शिवफल हेतू तुम, पद में अर्पण किये।।श्री अर.।।८।।</font color><br />
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शिवफल हेतू तुम, पद में अर्पण किये।।श्री अर.।।८।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>जल चंदन अक्षत, आदिक वसु द्रव्य ले।<br />
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<font color=green>जल चंदन अक्षत, आदिक वसु द्रव्य ले।
अर्घ चढ़ाऊँ ‘‘ज्ञानमती’’ निधियाँ मिलें।।श्री अर.।।९।।</font color><br />
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अर्घ चढ़ाऊँ ‘‘ज्ञानमती’’ निधियाँ मिलें।।श्री अर.।।९।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अनर्घपदप्राप्तये अर्घम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अनर्घपदप्राप्तये अर्घम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=#C71585>'''सोरठा'''</font color><br />  
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<font color=#C71585>'''सोरठा'''</font>  
  
<font color=green>अरजिन चरण सरोज, शांतीधारा मैं करूँ।<br />
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<font color=green>अरजिन चरण सरोज, शांतीधारा मैं करूँ।
चउसंघ  शांती  हेत,  शांतीधारा  जगत  में।।१०।।</font color><br />
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चउसंघ  शांती  हेत,  शांतीधारा  जगत  में।।१०।।</font>
  
<font color=#8B008B>'''शांतये शांतिधारा।'''</font><br />
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<font color=#8B008B>'''शांतये शांतिधारा।'''</font>
  
<font color=green>कमल केतकी पुष्प, सुरभित निजकर से चुने।<br />
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<font color=green>कमल केतकी पुष्प, सुरभित निजकर से चुने।
श्री जिनवर पदपद्म, पुष्पांजलि अर्पण करूँ।।११।।</font color><br />
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श्री जिनवर पदपद्म, पुष्पांजलि अर्पण करूँ।।११।।</font>
  
<font color=#8B008B>'''दिव्य पुष्पांजलि:।'''</font><br />
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<font color=#8B008B>'''दिव्य पुष्पांजलि:।'''</font>
 
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<font color=#C71585>'''पंचकल्याणक अर्घ्य'''</font color><br />
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<font color=#C71585>'''पंचकल्याणक अर्घ्य'''</font>
  
<font color=#C71585>'''सखी छंद'''</font color><br />
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<font color=#C71585>'''सखी छंद'''</font>
  
<font color=green>फाल्गुन कृष्णा तृतिया में, प्रभु गर्भ निवास किया तें।<br />
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<font color=green>फाल्गुन कृष्णा तृतिया में, प्रभु गर्भ निवास किया तें।
सुरपति  ने  उत्सव  कीना,  हम  पूजें  भवदुखहीना।।१।।</font color><br />
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सुरपति  ने  उत्सव  कीना,  हम  पूजें  भवदुखहीना।।१।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्णातृतीयायां श्रीअरनाथजिनगर्भकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्णातृतीयायां श्रीअरनाथजिनगर्भकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>मगसिर  शुक्ला  चौदस  के,  प्रभुजन्म  लिया  सुर  हर्षे।<br />
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<font color=green>मगसिर  शुक्ला  चौदस  के,  प्रभुजन्म  लिया  सुर  हर्षे।
मेरू  पर  न्हवन  हुआ  है,  इन्द्रों  ने  नृत्य  किया  है।।२।।</font color><br />
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मेरू  पर  न्हवन  हुआ  है,  इन्द्रों  ने  नृत्य  किया  है।।२।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं मार्गशीर्षशुक्लाचतुर्दश्यां श्रीअरनाथजिनजन्मकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं मार्गशीर्षशुक्लाचतुर्दश्यां श्रीअरनाथजिनजन्मकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>मगसिर सुदी दशमी तिथि में, दीक्षा धारी प्रभु वन में।<br />
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<font color=green>मगसिर सुदी दशमी तिथि में, दीक्षा धारी प्रभु वन में।
इंद्रों  से  पूजा  पाई,  हम  पूजें  मन  हरषाई।।३।।</font color><br />
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इंद्रों  से  पूजा  पाई,  हम  पूजें  मन  हरषाई।।३।।</font>
 
[[चित्र:by798.jpg|left|100px|]] [[चित्र:by798.jpg|right|100px|]]
 
[[चित्र:by798.jpg|left|100px|]] [[चित्र:by798.jpg|right|100px|]]
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं मार्गशीर्षशुक्लादशम्यां श्रीअरनाथजिनदीक्षाकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं मार्गशीर्षशुक्लादशम्यां श्रीअरनाथजिनदीक्षाकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>कार्तिक सुदि बारस तिथि में, केवल रवि प्रकटा निज में।<br />
+
<font color=green>कार्तिक सुदि बारस तिथि में, केवल रवि प्रकटा निज में।
बारह  गण  को  उपदेशा,  हम  पूजें  भक्ति  समेता।।४।।</font color><br />
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बारह  गण  को  उपदेशा,  हम  पूजें  भक्ति  समेता।।४।।</font>
 
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं कार्तिकशुक्लाद्वादश्यां श्रीअरनाथजिनकेवलज्ञानकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपमीति स्वाहा।'''</font color><br />  
+
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं कार्तिकशुक्लाद्वादश्यां श्रीअरनाथजिनकेवलज्ञानकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपमीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=green>शुभ  चैत्र  अमावस्या  में,  मुक्तिश्री  परणी  प्रभु  ने।<br />
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<font color=green>शुभ  चैत्र  अमावस्या  में,  मुक्तिश्री  परणी  प्रभु  ने।
इन्द्रोें  ने  की  प्रभु  अर्चा, पूजन  से  निजसुख  मिलता।।५।।</font color><br />
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इन्द्रोें  ने  की  प्रभु  अर्चा, पूजन  से  निजसुख  मिलता।।५।।</font>
 
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[[चित्र:by799.jpg|left|100px|]] [[चित्र:by799.jpg|100px|right|]]
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं चैत्रकृष्णामावस्यायां श्रीअरनाथजिनमोक्षकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
+
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं चैत्रकृष्णामावस्यायां श्रीअरनाथजिनमोक्षकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=#C71585>'''पूर्णार्घ्य (दोहा)'''</font color><br />
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<font color=#C71585>'''पूर्णार्घ्य (दोहा)'''</font>
  
<font color=green>अरहनाथ की वंदना, करे कर्मअरि नाश।<br />
+
<font color=green>अरहनाथ की वंदना, करे कर्मअरि नाश।
अर्घ्य चढ़ाकर पूजते, मिले सर्वगुण राशि।।६।।</font color><br />
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अर्घ्य चढ़ाकर पूजते, मिले सर्वगुण राशि।।६।।</font>
 
[[चित्र:Pushpanjali_1.jpg|100px|left]][[चित्र:Pushpanjali_1.jpg|100px|right]]
 
[[चित्र:Pushpanjali_1.jpg|100px|left]][[चित्र:Pushpanjali_1.jpg|100px|right]]
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरहनाथपंचकल्याणकाय पूर्णार्घ्यम्  निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरहनाथपंचकल्याणकाय पूर्णार्घ्यम्  निर्वपामीति स्वाहा।'''</font>  
  
<font color=#8B008B>'''शांतये शांतिधारा, दिव्य पुष्पांजलि:।'''</font><br />
+
<font color=#8B008B>'''शांतये शांतिधारा, दिव्य पुष्पांजलि:।'''</font>
<font color=#C71585>'''जाप्य-'''</font><font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय नम:।'''</font><br />
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<font color=#C71585>'''जाप्य-'''</font><font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय नम:।'''</font>
 
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[[चित्र:Jaap.JPG|50px|left]] [[चित्र:Jaap.JPG|50px|right]]
<font color=#C71585>'''जयमाला'''</font color><br />
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<font color=#C71585>'''जयमाला'''</font>
  
<font color=#C71585>'''दोहा'''</font color><br />
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<font color=#C71585>'''दोहा'''</font>
  
<font color=green>हस्तिनागपुर में हुये, गर्भ जन्म तप ज्ञान।<br />
+
<font color=green>हस्तिनागपुर में हुये, गर्भ जन्म तप ज्ञान।
सम्मेदाचल मोक्षथल, पूजूँ अर भगवान।।१।।'''</font color><br />
+
सम्मेदाचल मोक्षथल, पूजूँ अर भगवान।।१।।'''</font>
  
<font color=#C71585>'''त्रिभंगी छंद'''</font color><br />
+
<font color=#C71585>'''त्रिभंगी छंद'''</font>
  
<font color=green>पितु  नृपति  सुदर्शन  सोमवंशवर, प्रसू  मित्रसेना  सुत  थे।<br />
+
<font color=green>पितु  नृपति  सुदर्शन  सोमवंशवर, प्रसू  मित्रसेना  सुत  थे।
आयू  चौरासी  सहस  वर्ष  धनु,  तीस  तनू  स्वर्णिम  छवि  थे।।<br />
+
आयू  चौरासी  सहस  वर्ष  धनु,  तीस  तनू  स्वर्णिम  छवि  थे।।
गुरु तीस गणाधिप मुनि पचास, हज्जार आर्यिका साठ सहस।<br />
+
गुरु तीस गणाधिप मुनि पचास, हज्जार आर्यिका साठ सहस।
श्रावक इक लाख व साठ सहस, श्राविका लाख त्रय धर्मनिरत।।२।।'''</font color><br />
+
श्रावक इक लाख व साठ सहस, श्राविका लाख त्रय धर्मनिरत।।२।।'''</font>
  
<font color=#C71585>'''पंचचामर छंद'''</font color><br />
+
<font color=#C71585>'''पंचचामर छंद'''</font>
  
<font color=green>जयो जिनेश! आप तीर्थनाथ तीर्थरूप हो।<br />
+
<font color=green>जयो जिनेश! आप तीर्थनाथ तीर्थरूप हो।
जयो जिनेश! आप मुक्तिनाथ मुक्तिरूप हो।।<br />
+
जयो जिनेश! आप मुक्तिनाथ मुक्तिरूप हो।।
जयो जिनेश! आप तीन लोक के अधीश हो।<br />
+
जयो जिनेश! आप तीन लोक के अधीश हो।
जयो जिनेश! आप सर्व आश्रितों के मीत हो।।३।।<br /><br />
+
जयो जिनेश! आप सर्व आश्रितों के मीत हो।।३।।
सभी सुरेन्द्र भक्ति से सदैव वंदना करें।<br />
+
सभी सुरेन्द्र भक्ति से सदैव वंदना करें।
सभी नरेन्द्र आपकी सदैव अर्चना करें।। <br />
+
सभी नरेन्द्र आपकी सदैव अर्चना करें।।  
सभी खगेन्द्र हर्ष से जिनेन्द्र कीर्ति गावते।<br />
+
सभी खगेन्द्र हर्ष से जिनेन्द्र कीर्ति गावते।
सभी मुनीन्द्र चित्त में तुम्हीं को एक ध्यावते।।४।।<br /><br />
+
सभी मुनीन्द्र चित्त में तुम्हीं को एक ध्यावते।।४।।
अपूर्व तेज आप देख कोटि सूर्य लज्जते।<br />
+
अपूर्व तेज आप देख कोटि सूर्य लज्जते।
अपूर्व सौम्य मूर्ति देख कोटि चन्द्र लज्जते।।<br />
+
अपूर्व सौम्य मूर्ति देख कोटि चन्द्र लज्जते।।
अपूर्व  शांति  देख  क्रूर  जीव  वैर  छोड़ते।<br />
+
अपूर्व  शांति  देख  क्रूर  जीव  वैर  छोड़ते।
सुमंद मंद हास्य देख शुद्ध चित्त होवते।।५।।<br /><br />
+
सुमंद मंद हास्य देख शुद्ध चित्त होवते।।५।।
अनेक भव्य आपके पदाब्ज पूजते सदा।<br />
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अनेक भव्य आपके पदाब्ज पूजते सदा।
अनेक जन्म पाप भी क्षणेक में नशें तदा।।<br />
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अनेक जन्म पाप भी क्षणेक में नशें तदा।।
अनेक जीव भक्ति बिन अनंत जन्म धारते।<br />
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अनेक जीव भक्ति बिन अनंत जन्म धारते।
अनेक जीव भक्ति से अनंत सौख्य पावते।।६।।<br /><br />
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अनेक जीव भक्ति से अनंत सौख्य पावते।।६।।
अनंत  ज्ञानरूप  हो  अनंत  ज्ञानकार  हो।<br />
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अनंत  दर्शरूप  हो  अनंत  दर्शकार  हो।।<br />
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अनंत  सौख्यरूप  हो  अनंत  सौख्यकार  हो।<br />
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अनंत  सौख्यरूप  हो  अनंत  सौख्यकार  हो।
अनंत  वीर्यरूप  हो  अनंत  शक्तिकार  हो।।७।।</font color><br />
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अनंत  वीर्यरूप  हो  अनंत  शक्तिकार  हो।।७।।</font>
 
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<font color=green>कामदेव चक्रीश प्रभु, अठारवें तीर्थेश।<br />
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‘‘ज्ञानमती’’ कैवल्य हित, नमूँ नमूँ परमेश।।८।।</font color><br />
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‘‘ज्ञानमती’’ कैवल्य हित, नमूँ नमूँ परमेश।।८।।</font>
<font color=#8B008B>'''ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय जयमाला पूर्णार्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।'''</font color><br />  
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<font color=#8B008B>'''शांतये शांतिधारा। दिव्य पुष्पांजलि:।'''</font><br />
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<font color=#C71585>'''सोरठा'''</font color><br />
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<font color=green>मीन चिन्ह से नाथ! अरतीर्थंकर जगप्रथित।<br />
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<font color=green>मीन चिन्ह से नाथ! अरतीर्थंकर जगप्रथित।
जो पूजें नत माथ, पावें अविचल कीर्ति को।।१।।</font color><br />
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जो पूजें नत माथ, पावें अविचल कीर्ति को।।१।।</font>
  
<font color=#8B008B>'''।।इत्याशीर्वाद:।।'''</font><br />
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२०:५३, २४ जून २०२० का अवतरण

भगवान श्री अरहनाथ जिनपूजा

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दोहा
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तीर्थंकर अरनाथ! तुम, चक्ररत्न के ईश।
ध्यान चक्र से मृत्यु को, मारा त्रिभुवन ईश।।१।।
आह्वानन विधि से यहाँ, मैं पूजूँ धर प्रीत।
रोग शोक दु:ख नाशकर, लहूँ स्वात्म नवनीत।।२।।

ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र अवतर अवतर संवोषट् आह्वाननं।
ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ: स्थापनं।
ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्र! अत्र मम सन्निहितो भव भव वषट् सन्निधीकरणं।


अष्टक-अडिल्ल छंद

सिंधुनदी को नीर, स्वर्णझारी भरूँ।
मिले भवोदधितीर, तीन धारा करूँ।।
श्री अरनाथ जिनेन्द्र, जजूँ मन लाय के।
समतारस पीयूष, चखूँ तुम पाय के।।१।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय जन्मजरामृत्युविनाशनाय जलं निर्वपामीति स्वाहा।

केशर चंदन घिसा, कटोरी में भरा।
रागदाह हरने को, चर्चूं सुखकरा।।श्री अर.।।२।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय संसारतापविनाशनाय चंदनं निर्वपामीति स्वाहा।

चंद्रकिरण सम उज्ज्वल, अक्षत ले लिये।
तुम आगे मैं पुंज, धरूँ सुख के लिए।।श्री अर.।।३।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अक्षयपदप्राप्तये अक्षतं निर्वपामीति स्वाहा।

चंपा जुही गुलाब, पुष्प सुरभित लिये।
भव विजयी के चरणों, में अर्पण किये।।श्री अर.।।४।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय कामबाणविध्वंसनाय पुष्पं निर्वपामीति स्वाहा।

मालपुआ रसगुल्ला, बहु मिष्टान्न ले।
क्षुधारोग हर हेतु, चढ़ाऊँ नित भले।।श्री अर.।।५।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय क्षुधारोगविनाशनाय नैवेद्यं निर्वपामीति स्वाहा।

घृत दीपक ले करूँ, आरती नाथ की।
मोहध्वांत हर लहूँ, भारती ज्ञान की।।श्री अर.।।६।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय मोहान्धकारविनाशनाय दीपं निर्वपामीति स्वाहा।

अगर तगर वर धूप, अग्नि में खेवते।
कर्म दूर हो नाथ! चरण युग सेवते।।श्री अर.।।७।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अष्टकर्मविध्वंसनाय धूपं निर्वपामीति स्वाहा।

श्रीफल पूग बदाम, आम केला लिये।
शिवफल हेतू तुम, पद में अर्पण किये।।श्री अर.।।८।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय मोक्षफलप्राप्तये फलं निर्वपामीति स्वाहा।

जल चंदन अक्षत, आदिक वसु द्रव्य ले।
अर्घ चढ़ाऊँ ‘‘ज्ञानमती’’ निधियाँ मिलें।।श्री अर.।।९।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय अनर्घपदप्राप्तये अर्घम् निर्वपामीति स्वाहा।

सोरठा

अरजिन चरण सरोज, शांतीधारा मैं करूँ।
चउसंघ शांती हेत, शांतीधारा जगत में।।१०।।


शांतये शांतिधारा।

कमल केतकी पुष्प, सुरभित निजकर से चुने।
श्री जिनवर पदपद्म, पुष्पांजलि अर्पण करूँ।।११।।


दिव्य पुष्पांजलि:।

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पंचकल्याणक अर्घ्य

सखी छंद

फाल्गुन कृष्णा तृतिया में, प्रभु गर्भ निवास किया तें।
सुरपति ने उत्सव कीना, हम पूजें भवदुखहीना।।१।।

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ॐ ह्रीं फाल्गुनकृष्णातृतीयायां श्रीअरनाथजिनगर्भकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।

मगसिर शुक्ला चौदस के, प्रभुजन्म लिया सुर हर्षे।
मेरू पर न्हवन हुआ है, इन्द्रों ने नृत्य किया है।।२।।

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ॐ ह्रीं मार्गशीर्षशुक्लाचतुर्दश्यां श्रीअरनाथजिनजन्मकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।

मगसिर सुदी दशमी तिथि में, दीक्षा धारी प्रभु वन में।
इंद्रों से पूजा पाई, हम पूजें मन हरषाई।।३।।

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ॐ ह्रीं मार्गशीर्षशुक्लादशम्यां श्रीअरनाथजिनदीक्षाकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।

कार्तिक सुदि बारस तिथि में, केवल रवि प्रकटा निज में।
बारह गण को उपदेशा, हम पूजें भक्ति समेता।।४।।

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ॐ ह्रीं कार्तिकशुक्लाद्वादश्यां श्रीअरनाथजिनकेवलज्ञानकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपमीति स्वाहा।

शुभ चैत्र अमावस्या में, मुक्तिश्री परणी प्रभु ने।
इन्द्रोें ने की प्रभु अर्चा, पूजन से निजसुख मिलता।।५।।

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ॐ ह्रीं चैत्रकृष्णामावस्यायां श्रीअरनाथजिनमोक्षकल्याणकाय अर्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।

पूर्णार्घ्य (दोहा)

अरहनाथ की वंदना, करे कर्मअरि नाश।
अर्घ्य चढ़ाकर पूजते, मिले सर्वगुण राशि।।६।।

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ॐ ह्रीं श्रीअरहनाथपंचकल्याणकाय पूर्णार्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।

शांतये शांतिधारा, दिव्य पुष्पांजलि:।
जाप्य-ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय नम:।

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जयमाला

दोहा

हस्तिनागपुर में हुये, गर्भ जन्म तप ज्ञान।
सम्मेदाचल मोक्षथल, पूजूँ अर भगवान।।१।।


त्रिभंगी छंद

पितु नृपति सुदर्शन सोमवंशवर, प्रसू मित्रसेना सुत थे।
आयू चौरासी सहस वर्ष धनु, तीस तनू स्वर्णिम छवि थे।।
गुरु तीस गणाधिप मुनि पचास, हज्जार आर्यिका साठ सहस।
श्रावक इक लाख व साठ सहस, श्राविका लाख त्रय धर्मनिरत।।२।।


पंचचामर छंद

जयो जिनेश! आप तीर्थनाथ तीर्थरूप हो।
जयो जिनेश! आप मुक्तिनाथ मुक्तिरूप हो।।
जयो जिनेश! आप तीन लोक के अधीश हो।
जयो जिनेश! आप सर्व आश्रितों के मीत हो।।३।।
सभी सुरेन्द्र भक्ति से सदैव वंदना करें।
सभी नरेन्द्र आपकी सदैव अर्चना करें।।
सभी खगेन्द्र हर्ष से जिनेन्द्र कीर्ति गावते।
सभी मुनीन्द्र चित्त में तुम्हीं को एक ध्यावते।।४।।
अपूर्व तेज आप देख कोटि सूर्य लज्जते।
अपूर्व सौम्य मूर्ति देख कोटि चन्द्र लज्जते।।
अपूर्व शांति देख क्रूर जीव वैर छोड़ते।
सुमंद मंद हास्य देख शुद्ध चित्त होवते।।५।।
अनेक भव्य आपके पदाब्ज पूजते सदा।
अनेक जन्म पाप भी क्षणेक में नशें तदा।।
अनेक जीव भक्ति बिन अनंत जन्म धारते।
अनेक जीव भक्ति से अनंत सौख्य पावते।।६।।
अनंत ज्ञानरूप हो अनंत ज्ञानकार हो।
अनंत दर्शरूप हो अनंत दर्शकार हो।।
अनंत सौख्यरूप हो अनंत सौख्यकार हो।
अनंत वीर्यरूप हो अनंत शक्तिकार हो।।७।।

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दोहा

कामदेव चक्रीश प्रभु, अठारवें तीर्थेश।
‘‘ज्ञानमती’’ कैवल्य हित, नमूँ नमूँ परमेश।।८।।

ॐ ह्रीं श्रीअरनाथजिनेन्द्राय जयमाला पूर्णार्घ्यम् निर्वपामीति स्वाहा।

शांतये शांतिधारा। दिव्य पुष्पांजलि:।

सोरठा

मीन चिन्ह से नाथ! अरतीर्थंकर जगप्रथित।
जो पूजें नत माथ, पावें अविचल कीर्ति को।।१।।


।।इत्याशीर्वाद:।।

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