"आदिनाथ" के अवतरणों में अंतर

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(ऋषभदेव को अनुप्रेषित)
 
पंक्ति १: पंक्ति १:
 +
#अनुप्रेषित [[ऋषभदेव]]
 
'''आदिनाथ'''<br />
 
'''आदिनाथ'''<br />
 
The first Tirthankar (Jaina Lord), born in Ayodhya, His father was Nabhirai & mother was Marudevi. He took Jaina initiation in Prayag (Allahabad). After doing austerity for 1000 years, He got omniscience & ultimately got salvation from Kailash Parvat (a mountain). ऋषभदेव-भरतक्षेत्र में वर्तमान चैबीसी के प्रथम तीर्थंकर। चैत्र कृ.9 को इनका जन्म अयोध्या में हुआ था। पिता का नाम नाभिराय तथा माता का नाम मरूदेवी था। अयोध्या में निर्मित 81 मंजिल ऊंचे सर्वतोभद्र नामक राजमहल में इनका निवास था। यशस्वती एंव सुनंदा नामक राजकन्याओं के साथ इनका विवाह हुआ जिनसे भरत, बाहुबली आदि 101 पुत्र तथा ब्राह्मी, सुन्दरी दो कन्याओं ने जन्म लिया। नीलांजना नामक अप्सरा का नृत्य देखते हुए ऋषभदेव को वैराग्य हुआ और प्रयाग नगरी में वटवृक्ष के नीचे जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर 1000 वर्षों तक तपस्या करने के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। पुनः 99000 वर्षों तक श्रीविहार करते हुए समवसरण में भव्य जीवों को उपदेश दिया और आयु के अंत में 14 दिन का योग निरोध करके माघ कृ. 14 के दिन कैलाश पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। इन्होंने युग के आदि में प्रजा को असि, मषि, कृषि आदि षट्क्रियाओं का उपदेश देकर कर्मभूमि का शुभारंभ किया तथा सर्वप्रथम अपनी पुत्रीयों को लिपि एंव अंक विद्या सिखाई थीं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
 
The first Tirthankar (Jaina Lord), born in Ayodhya, His father was Nabhirai & mother was Marudevi. He took Jaina initiation in Prayag (Allahabad). After doing austerity for 1000 years, He got omniscience & ultimately got salvation from Kailash Parvat (a mountain). ऋषभदेव-भरतक्षेत्र में वर्तमान चैबीसी के प्रथम तीर्थंकर। चैत्र कृ.9 को इनका जन्म अयोध्या में हुआ था। पिता का नाम नाभिराय तथा माता का नाम मरूदेवी था। अयोध्या में निर्मित 81 मंजिल ऊंचे सर्वतोभद्र नामक राजमहल में इनका निवास था। यशस्वती एंव सुनंदा नामक राजकन्याओं के साथ इनका विवाह हुआ जिनसे भरत, बाहुबली आदि 101 पुत्र तथा ब्राह्मी, सुन्दरी दो कन्याओं ने जन्म लिया। नीलांजना नामक अप्सरा का नृत्य देखते हुए ऋषभदेव को वैराग्य हुआ और प्रयाग नगरी में वटवृक्ष के नीचे जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर 1000 वर्षों तक तपस्या करने के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। पुनः 99000 वर्षों तक श्रीविहार करते हुए समवसरण में भव्य जीवों को उपदेश दिया और आयु के अंत में 14 दिन का योग निरोध करके माघ कृ. 14 के दिन कैलाश पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। इन्होंने युग के आदि में प्रजा को असि, मषि, कृषि आदि षट्क्रियाओं का उपदेश देकर कर्मभूमि का शुभारंभ किया तथा सर्वप्रथम अपनी पुत्रीयों को लिपि एंव अंक विद्या सिखाई थीं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]

१३:२२, २३ जुलाई २०१९ के समय का अवतरण

को अनुप्रेषित:

आदिनाथ
The first Tirthankar (Jaina Lord), born in Ayodhya, His father was Nabhirai & mother was Marudevi. He took Jaina initiation in Prayag (Allahabad). After doing austerity for 1000 years, He got omniscience & ultimately got salvation from Kailash Parvat (a mountain). ऋषभदेव-भरतक्षेत्र में वर्तमान चैबीसी के प्रथम तीर्थंकर। चैत्र कृ.9 को इनका जन्म अयोध्या में हुआ था। पिता का नाम नाभिराय तथा माता का नाम मरूदेवी था। अयोध्या में निर्मित 81 मंजिल ऊंचे सर्वतोभद्र नामक राजमहल में इनका निवास था। यशस्वती एंव सुनंदा नामक राजकन्याओं के साथ इनका विवाह हुआ जिनसे भरत, बाहुबली आदि 101 पुत्र तथा ब्राह्मी, सुन्दरी दो कन्याओं ने जन्म लिया। नीलांजना नामक अप्सरा का नृत्य देखते हुए ऋषभदेव को वैराग्य हुआ और प्रयाग नगरी में वटवृक्ष के नीचे जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर 1000 वर्षों तक तपस्या करने के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। पुनः 99000 वर्षों तक श्रीविहार करते हुए समवसरण में भव्य जीवों को उपदेश दिया और आयु के अंत में 14 दिन का योग निरोध करके माघ कृ. 14 के दिन कैलाश पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। इन्होंने युग के आदि में प्रजा को असि, मषि, कृषि आदि षट्क्रियाओं का उपदेश देकर कर्मभूमि का शुभारंभ किया तथा सर्वप्रथम अपनी पुत्रीयों को लिपि एंव अंक विद्या सिखाई थीं।