Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


खुशखबरी ! पू० श्रीज्ञानमती माताजी का मंगल प्रवेश सूरत शहर में 11 Nov. को प्रात: 8 बजे हो गया है |

और पढ़े

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
Images (121).jpg

परम पूज्य गणिनी ज्ञानमती माता जी ससंघ सूरत शहर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रही है |सभी भक्त ज्ञान की गंगा में डुबकी लगा रहें है|सूरत शहर के भक्तों के मन में बहुत ही हर्ष और उल्सास दिखाई देता है |

मगशिर कृष्णा दशमी की तिथि है |

मगशिर कृष्णा दशमी को भगवन महावीर का दीक्षा कल्याणक महोत्सव माताजी के सानिध्य में बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है |पूज्य चंदनामती माताजी ने प्रवचन में भगवान महावीर की कथा से जन - जन को परिचित कराया |माताजी ने बहुत ही सुंदर कविता के माध्यम से महावीर भगवान के बारे में बताया |

वीर महावीर बोलो जय -जय महावीर -२ |

शेर एक था जंगल का राजा , उसको डर न किसी का भी था |

एक हिरन को मार गिराया , अपना भोजन उसे बनाया |

वह क्या जाने पर की पीर , वीर महावीर बोलो .....|

उसी समय आकाश मार्ग से , दो मुनि आये दया भाव से |

( अजितंजय , अमितंजय नाम के मुनि )

उनने उसे उपदेश सुनाया , हे मृगराज बहुत दुःख पाया |

अब तू तज दे हिंसा वीर ,वीर महावीर बोलो जय -जय महावीर -२ |

( दोनों मुनिराज उस शेर को संबोधित करते हैं )

शेर ने गुरु सम्बोधन पाया , जातिस्मरण उसे हो आया |

पिछले भवों का स्मरण जो आया , आँखो से झर - झर आँसू बहाया ।।

मन में भरा समयक्त्व का नीर , वीर महावीर .......

( महावीर बनना है हमको भी एक न एक दिन तो विचार करना कि -

हे भगवान मुझे भी ऐसी माता से जन्म लेना पड़े , जिसे सोलह स्वप्न दिखते हो , सोलह स्वप्न तीर्थंकर की माता को दिखते हैं |

शेर की शांत भावना लखके , अणुव्रत ग्रहण कराया मुनि ने |

वह अब सच्चा श्रावक बन गया , निराहार व्रत ग्रहण कर लिया |

बड़ा रोमांचक चरित महावीर , वीर महावीर .......|

एक माह निराहार रहा वो , पशुओं ने मृतक समझ लिया उसको |

नोंच-नोंच कर उसको खाया , कष्ट सहन कर सुरपति पाया |

पाया स्वर्ग में दिव्य शरीर , वीर महावीर .......|

( अर्थात् शेर को शेर की पर्याय से दिव्य वैक्रियक शरीर मिल जाता है |)वहाँ वह सोचता है कि-

मुनियों ने मुझे संबोधित किया , मुझे आत्मा का सार बताया था | फिर आगे क्या होता है -

दो सागर की आयु बिताकर , जन्मा धातकी खंड में आकर |

राजपुत्र कन्कोज्वल बनकर , दीक्षा लेकर बन गए मुनिवर |

फिर संन्यास से तजा शरीर |

वीर महावीर .......|

ऐसे करते - करते शेर ने भी अब भवों की लिमिट बांध ली |

और वह देवता से मनुष्य , मनुष्य से देवता बनकर अपना जीवन धन्य करने लगा |

फिर एक दिन वह नंदमुनि की पर्याय में आता है |

नंद मुनि की उस पर्याय में सोलहकारण भावना भाते हुवे तीर्थंकर प्रकृति को बांधा |

अपने परम लक्ष्य को साधा |

अब उनने बनना है महावीर |

वीर महावीर .....|

अब इसका सार बताती है माताजी |

सुनो बंधु समयक्त्व की महिमा , चार बार मुनि बनने की महिमा |

आखिर तीर्थंकर पद पाया , जग को मोक्ष का मार्ग बताया |

खुद बन गए वीरा अशरीर , वीर महावीर बोलो जय - जय महावीर |

जय बोलो महावीर भगवान की जय |