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कभी तू माता लगती है, कभी तू बाला लगती है

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कभी तू माता लगती है

तर्ज—कभी तू......

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कभी तू माता लगती है, कभी तू बाला लगती है।
कभी उजियाला लगती है, ज्ञान का प्याला लगती है।।
जय माता की, बोलो जय माता की......
तू सरस्वती मां की प्रतिमूरत लगती है।
प्रभु आदिनाथ की पुत्री जैसी सूरत लगती है।।
कभी तू माता लगती है, कभी तू बाला लगती है।
कभी उजियाला लगती है, ज्ञान का प्याला लगती है।।
कभी तू माता लगती है......।। टेक.।।
तीर्थंकर की धरती पर जनम लिया है तुमने।
धरती औ नभ के चन्दा का मिलन हुआ आपस में।।
तू शारद माता की प्रतिमूरत लगती है।
मां ब्राह्मी जैसी तेरी कुछ-कुछ सूरत लगती है।।
कभी तू माता लगती है......।।१।।
तीर्थंकर की ही धरती पर जम्बूद्वीप बनाया।
जप तप करके उसी भूमि का जीर्णोद्धार कराया।।
जिनवाणी माँ की तू प्रतिमूरत लगती है।
माँ ब्राह्मी जैसी तेरी कुछ-कुछ सूरत लगती है।।
कभी तू माता लगती है......।।२।।

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