"करती हूँ तुम्हारी भक्ति, स्वीकार करो माँ" के अवतरणों में अंतर

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पंक्ति १: पंक्ति १:
 
==<center><font color=green>करती हूँ तुम्हारी भक्ती</font></center>==
 
==<center><font color=green>करती हूँ तुम्हारी भक्ती</font></center>==
 
तर्ज—करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं......
 
तर्ज—करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं......
<poem><center>[[चित्र:1_(156)_(Small).jpg|100px]]
+
<poem><center>[[चित्र:1_(156)_(Small).jpg|200px]]
 
करती हूँ तुम्हारी भक्ती, स्वीकार करो माँ।
 
करती हूँ तुम्हारी भक्ती, स्वीकार करो माँ।
 
आये हैं तुम्हारे दर पे, भव से पार करो माँ।।
 
आये हैं तुम्हारे दर पे, भव से पार करो माँ।।

१०:०९, १५ फ़रवरी २०१४ का अवतरण

करती हूँ तुम्हारी भक्ती

तर्ज—करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं......

<poem>
1 (156) (Small).jpg

करती हूँ तुम्हारी भक्ती, स्वीकार करो माँ। आये हैं तुम्हारे दर पे, भव से पार करो माँ।। ओ पूज्य माता, ओ ज्ञान की दाता।। टेक.।। ज्ञानमती तेरा नाम है, तू ज्ञान पुजारन। बन जाओ इस जीवन की, तुम तरन और तारण।। कष्ट करो निवारण, ये उपकार करो माँ। आये हैं तुम्हारे दर पे, भव से पार करो माँ।। ओ पूज्य माता, ओ ज्ञान की दाता।।१।। बाल ब्रह्मचारिणी प्रथम, हो ज्ञान की दाता। जीवन भर तेरी पूजा करूँ, दो ऐसा वर माता।। उस ज्ञान की गंगा का, प्रचार करो माँ। आये हैं तुम्हारे दर पे, भव से पार करो माँ।। ओ पूज्य माता, ओ ज्ञान की दाता।।२।। अमृतमयी वाणी से तुमने, लाखों को तारा। हम भी आशा ले आए, माता दे दो सहारा।। नमन करें चरणों में हम, उद्धार करो माँ। आये हैं तुम्हारे दर पे, भव से पार करो माँ।। ओ पूज्य माता, ओ ज्ञान की दाता।।३।।

Xcz9.jpg